(नई दिल्ली)’मन की बातÓ में प्रधानमंत्री ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति से लेकर जनगणना और पर्यावरण संरक्षण तक की चर्चा
सर्जिकल स्ट्राइक के 10 वर्ष पूरे होने पर वीर जवानों को किया याद, जनगणना में स्व-गणना के लिए देशवासियों से की अपील
नई दिल्ली, ,27 सितंबर ,(आरएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बातÓ की 138वीं कड़ी में देशवासियों को संबोधित करते हुए आतंकवाद के खिलाफ भारत की कार्रवाई, जनगणना, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, नशामुक्ति अभियान, खेल प्रतिभाओं की खोज, स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने और पोषण जैसे विभिन्न विषयों पर चर्चा की। उन्होंने 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक के 10 वर्ष पूरे होने का उल्लेख करते हुए वीर जवानों के साहस को याद किया और कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत अब ‘जीरो टॉलरेंसÓ की नीति के साथ आगे बढ़ रहा है।
सर्जिकल स्ट्राइक को हुए 10 वर्ष
प्रधानमंत्री ने कहा कि 28-29 सितंबर, 2016 को भारतीय सेना ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक की थी। नियंत्रण रेखा के पार जाकर भारतीय जवानों की इस कार्रवाई ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति का नया उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि आतंकवादी हमलों के कारण भारत ने लंबे समय तक दर्द झेला है। बालाकोट एयर स्ट्राइक से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक भारत ने बार-बार यह संदेश दिया है कि आतंकवादी हमलों का जवाब दिया जाएगा।
उन्होंने 13 सितंबर, 2008 को दिल्ली में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों और उसके कुछ सप्ताह बाद मुंबई में हुए 26/11 आतंकी हमले को भी याद किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले आतंकी हमलों के बाद कार्रवाई की मांग होती थी, लेकिन अब भारत आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रहा है।
प्रधानमंत्री ने अमेरिका में 11 सितंबर, 2001 को हुए आतंकी हमलों के 25 वर्ष पूरे होने का भी उल्लेख किया। उन्होंने वर्ल्ड ट्रेड सेंटर हमले में जान गंवाने वाले लोगों और उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
जनगणना में स्व-गणना के लिए अपील
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में जनगणना की तस्वीर तैयार हो रही है और सभी राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों में इसका पहला चरण लगभग पूरा हो चुका है। अब तक 32 करोड़ से अधिक परिवारों की जानकारी दर्ज की जा चुकी है। लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के दुर्गम तथा बर्फीले क्षेत्रों में भी जनगणना का कार्य जारी है।
उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में जनगणना की शुरुआत चमोली के माणा गांव से हुई, जहां 83 वर्षीय पूर्णिमा रावत से इसकी शुरुआत की गई। उत्तरकाशी के बगोरी गांव में गृह-आवास संचालक हरदेव सिंह राणा ने डिजिटल माध्यम से अपनी जानकारी स्वयं दर्ज की।
प्रधानमंत्री ने नागरिकों से स्व-गणना की सुविधा का लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने बताया कि जनगणना पोर्टल पर मोबाइल के माध्यम से परिवार की जानकारी दर्ज की जा सकती है। यह सुविधा हिंदी सहित 16 भाषाओं में उपलब्ध है और पूरी प्रक्रिया में करीब 15 से 20 मिनट लगते हैं। इसके लिए किसी दस्तावेज को अपलोड करने की आवश्यकता नहीं है। जानकारी जमा करने के बाद एक विशेष पहचान संख्या मिलती है, जिसे गणनाकर्मी के आने पर बताया जा सकता है। प्रधानमंत्री के अनुसार अब तक 2 करोड़ 60 लाख से अधिक लोग मोबाइल के माध्यम से स्व-गणना कर चुके हैं।
अशोक सिंहल को जन्मशताब्दी पर श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री ने विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष स्वर्गीय अशोक सिंहल को उनकी 100वीं जयंती पर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि 27 सितंबर, 1926 को आगरा में जन्मे अशोक सिंहल ने अपना जीवन समाज, संस्कृति और राष्ट्र के लिए समर्पित किया।
प्रधानमंत्री ने रामजन्मभूमि आंदोलन में सिंहल की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने सामाजिक भेदभाव और विषमता के खिलाफ भी काम किया। उन्होंने बताया कि अशोक सिंहल का जन्म समृद्ध परिवार में हुआ था और उन्होंने आईआईटी-बीएचयू से शिक्षा प्राप्त की थी, लेकिन उन्होंने अपना जीवन समाज और संस्कृति को समर्पित कर दिया।
सोमनाथ और मोढेरा की विरासत का उल्लेख
प्रधानमंत्री ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1026 में मोहम्मद गजनी द्वारा सोमनाथ मंदिर को नुकसान पहुंचाया गया था। इसी कालखंड में गुजरात के मोढेरा स्थित प्रसिद्ध सूर्य मंदिर पर भी हमला हुआ था। उन्होंने बताया कि मोढेरा सूर्य मंदिर का निर्माण राजा भीमदेव ने 1025 में कराया था।
प्रधानमंत्री ने कहा कि राजा भीमदेव प्रथम ने आक्रमण का मुकाबला करने के साथ ही मोढेरा सूर्य मंदिर का पुनर्निर्माण भी कराया। उन्होंने कहा कि मंदिर पर बाद के काल में भी हमले हुए, लेकिन सूर्य उपासना केवल मंदिर और वास्तुकला तक सीमित नहीं है। यह प्रकाश, ऊर्जा, विज्ञान और निरंतरता की प्रेरणा भी देती है।
प्रधानमंत्री ने मोढेरा को देश का पहला सौर गांव बताते हुए कहा कि यह आज सौर ऊर्जा से संचालित होता है और टिकाऊ विकास का उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। उन्होंने लोगों से मोढेरा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत देखने के लिए वहां जाने का आग्रह किया।
विरासत संरक्षण में स्थानीय प्रयासों की सराहना
प्रधानमंत्री ने तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली के मनप्पारई में प्राचीन प्रतिमाओं और मंदिरों की खोज के प्रयास का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि तमिल अध्ययन विभाग से जुड़े ए. सेल्वाराजू को एक व्याख्यान के दौरान अपने विद्यार्थी से प्राचीन प्रतिमाओं की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने क्षेत्र का दौरा किया, जहां अलग-अलग स्थानों पर कई प्राचीन प्रतिमाएं और मंदिर मिले।
उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास लोगों को अपने इतिहास और विरासत को करीब से जानने का अवसर देते हैं और देश के अन्य हिस्सों में भी इस तरह के प्रयास किए जा सकते हैं।
स्वच्छता को बापू के प्रति सबसे सुंदर श्रद्धांजलि बताया
2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने स्वच्छता से जुड़े देशभर के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने मध्य प्रदेश में युवाओं द्वारा नदियों की सफाई, आंध्र प्रदेश में पुरानी बावड़ियों और कुओं की सफाई, मुंबई में समुद्र तटों की स्वच्छता और दिल्ली में बच्चों तथा युवाओं द्वारा कचरा अलग-अलग रखने के लिए चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों का उल्लेख किया।
उन्होंने पश्चिम बंगाल में युवाओं और स्थानीय लोगों द्वारा पिकनिक स्थलों की सफाई के प्रयासों की भी चर्चा की। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन अभियानों में जनभागीदारी दिखाई देती है। कई बार एक व्यक्ति से शुरू हुआ प्रयास धीरे-धीरे पूरे समाज का अभियान बन जाता है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के प्रति सबसे सुंदर श्रद्धांजलि स्वच्छता है।
पर्यावरण संरक्षण से लौटे हाथी, बढ़ी पिग्मी हॉग की संख्या
प्रधानमंत्री ने असम के सोनाई रुपाई वन्यजीव अभयारण्य का उदाहरण देते हुए बताया कि कभी यहां हाथियों का बसेरा था, लेकिन मानवीय अतिक्रमण बढ़ने के कारण हाथियों ने क्षेत्र से दूरी बना ली थी। तीन वर्ष पहले जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया, जिसके बाद हाथियों की वापसी हुई है।
उन्होंने असम में पिग्मी हॉग के संरक्षण कार्यक्रम का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री के अनुसार एक समय इस छोटे जीव के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा था। छह पिग्मी हॉग के साथ संरक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया और उनके लिए घासभूमियों को विकसित किया गया। अब इनकी संख्या 190 से अधिक हो चुकी है।
पश्चिम बंगाल के सुंदरबन में झारखाली की महिलाओं द्वारा मैंग्रोव वन तैयार करने के प्रयास की भी प्रधानमंत्री ने सराहना की। उन्होंने बताया कि इनमें कई महिलाएं ऐसी हैं, जिनके पति बाघ के हमले में मारे गए। मैंग्रोव लगाने से जहां गांवों को प्राकृतिक सुरक्षा मिल रही है, वहीं इन महिलाओं की आय का साधन भी तैयार हुआ है।
‘नशामुक्त युवा अभियानÓ में युवाओं की भागीदारी
प्रधानमंत्री ने नशे के खिलाफ चलाए जा रहे ‘नशामुक्त युवा अभियानÓ का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के लाखों युवाओं ने नशे से दूर रहने का संकल्प लिया है। 100 सप्ताह तक चलने वाले इस अभियान में माय भारत के स्वयंसेवक, राष्ट्रीय सेवा योजना से जुड़े युवा, स्कूल-कॉलेज और विश्वविद्यालय तथा सामाजिक और आध्यात्मिक संस्थाएं भाग ले रही हैं।
उन्होंने बताया कि देशभर में हजारों संकल्प समारोह और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। युवाओं ने गीत, नारा लेखन और नुक्कड़ नाटक जैसी रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से अभियान को आगे बढ़ाया है। सामाजिक माध्यमों पर भी ‘नशामुक्त युवाÓ के साथ रचनात्मक सामग्री साझा की जा रही है। आने वाले दिनों में स्वास्थ्य जांच और ध्यान शिविर जैसी गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी।
प्रधानमंत्री ने त्योहारों के दौरान युवाओं पर विशेष ध्यान देने की अपील करते हुए कहा कि यदि कोई युवा गलत आदत की ओर बढ़ रहा हो तो उससे संवाद किया जाए और नशे से बाहर निकलने का प्रयास कर रहे व्यक्ति का सहयोग किया जाए।
गांवों में खेल प्रतिभाओं की खोज पर जोर
प्रधानमंत्री ने लाल किले से घोषित खेल प्रतिभा खोज अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में खेलों को आगे बढ़ाने के लिए गांवों और कस्बों तक पहुंचकर प्रतिभाओं की पहचान करना जरूरी है।
उन्होंने पंजाब के राजिंदर सिंह सीनियर के प्रयासों की चर्चा की। राजिंदर सिंह 1980 के ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के सदस्य रहे थे। 1982 के विश्व कप में भी उनका प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा। वर्ष 2001 में भारत ने पहली बार पुरुष जूनियर विश्व कप और 2003 में सीनियर एशिया कप का खिताब जीता। दोनों प्रतियोगिताओं में राजिंदर सिंह कोच की भूमिका में थे।
उन्होंने बताया कि राजिंदर सिंह अब राउंड ग्लास हॉकी अकादमी के माध्यम से गांवों में हॉकी प्रतिभाओं को तलाशने और तराशने का काम कर रहे हैं। उनके प्रयासों से गांवों में हॉकी के कृत्रिम टर्फ मैदान तैयार किए जा रहे हैं, जिससे सीमित प्रशिक्षण सुविधाओं वाले क्षेत्रों के बच्चों को अवसर मिल रहा है।
प्रतापगढ़ में आंवला बना रोजगार और आय का माध्यम
प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में आंवले से जुड़े स्थानीय उद्योगों की चर्चा करते हुए कहा कि आंवला इस जिले की पुरानी पहचान है और अब यही पहचान किसानों तथा महिलाओं के लिए नए अवसर पैदा कर रही है।
उन्होंने बताया कि ‘एक जिला, एक उत्पादÓ योजना के माध्यम से प्रतापगढ़ में आंवला आधारित स्थानीय उद्यमों को बढ़ावा मिला है। जिले में आंवला प्रसंस्करण से जुड़ी करीब 100 इकाइयां काम कर रही हैं और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
देवगढ़ कमासी गांव के सावित्री फुले स्वयं सहायता समूह की महिलाएं आंवले से कैंडी, मुरब्बा और रस तैयार कर रही हैं। वहीं एक अन्य गांव के विंध्यवासिनी स्वयं सहायता समूह की महिलाएं आंवले का अचार और पाचन चूर्ण सहित कई उत्पाद तैयार कर रही हैं। महिलाओं को प्रसंस्करण के लिए मशीनरी, ऋण और व्यापार मेलों में भाग लेने के अवसर मिले हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के हर क्षेत्र की कोई न कोई विशेषता है। ‘एक जिला, एक उत्पादÓ का उद्देश्य इन स्थानीय विशेषताओं को देश और दुनिया के बाजार तक पहुंचाना है। इससे स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिलने के साथ ‘वोकल फॉर लोकलÓ अभियान और आत्मनिर्भरता को भी बल मिलता है।
कुपोषण के खिलाफ राज्यों की पहल की सराहना
प्रधानमंत्री ने सितंबर को कुपोषण के खिलाफ अभियान को समर्पित पोषण माह के रूप में उल्लेखित करते हुए विभिन्न राज्यों की पहलों की जानकारी दी। उन्होंने छत्तीसगढ़ के ‘हर घर मुनगा-घर-घर मुनगाÓ अभियान का उल्लेख किया, जिसके तहत लोगों को पौष्टिक मुनगा यानी सहजन को भोजन में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
गुजरात में मिलेट से बने व्यंजनों की प्रतियोगिता आयोजित किए जाने की जानकारी देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अब तक दो लाख से अधिक लोग इसमें हिस्सा ले चुके हैं। महाराष्ट्र में शिक्षक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और बच्चों के माता-पिता जागरूकता अभियान से जुड़े हैं। मिजोरम में पोषण वाटिकाओं की देखभाल के लिए सामुदायिक अभियान चलाया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि आंगनवाड़ी केंद्र अब पोषण ट्रैकर से डिजिटल रूप से जुड़ चुके हैं और करीब 9 करोड़ लाभार्थी इसमें पंजीकृत हो चुके हैं। इससे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं की बेहतर देखभाल में सहायता मिल रही है।
थाईलैंड में भी लोकप्रिय हो रही गणेश उपासना
प्रधानमंत्री ने हाल में संपन्न गणेश उत्सव का उल्लेख करते हुए भगवान गणेश को ज्ञान, बुद्धि और शुभ कार्यों के आरंभ का प्रतीक बताया। उन्होंने थाईलैंड के पंथौन थीरखानोन का उदाहरण दिया, जो चार दशक से अधिक समय से भगवान गणेश से जुड़ी परंपराओं का अध्ययन कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री के अनुसार 19 वर्ष की उम्र में उनके पिता ने उन्हें भगवान गणेश की तस्वीर भेंट की थी, जिसके बाद उनमें गणेश भक्ति की रुचि विकसित हुई। उन्होंने भारत और नेपाल सहित एशिया के कई देशों की यात्रा की और महाराष्ट्र की अष्टविनायक परंपरा का अध्ययन किया।
वर्ष 2002 में उन्होंने उत्तरी थाईलैंड के चियांग माई में गणेश हिमाल संग्रहालय की स्थापना की। इसमें 10 हजार से अधिक गणेश प्रतिमाएं हैं। संग्रहालय में अष्टविनायक की प्रतिमाएं भी रखी गई हैं। यहां प्रत्येक रविवार सुबह गणेश पूजा होती है और विशेष अवसरों पर अनुष्ठान भी आयोजित किए जाते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह भारत की आस्था, कला और सांस्कृतिक परंपराओं के दूसरे देशों में लोकप्रिय होने का उदाहरण है। अंत में उन्होंने देशवासियों को आगामी त्योहारों की शुभकामनाएं दीं और ‘मन की बातÓ के माध्यम से प्रेरणादायक प्रयासों की जानकारी साझा करते रहने का आग्रह किया।
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(नई दिल्ली)रबी अभियान 2026 पर राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन कल से नई दिल्ली में
केंद्र-राज्य तालमेल मजबूत करने और कृषि विकास के लिए परिणाम-उन्मुख रणनीति पर होगा मंथन
नई दिल्ली, ,27 सितंबर ,(आरएनएस)। आगामी रबी मौसम की तैयारियों और प्रमुख प्राथमिकताओं पर चर्चा के लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा दो दिवसीय राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन का आयोजन 28 और 29 सितंबर को नई दिल्ली में किया जाएगा। सम्मेलन का आयोजन भारत रत्न सी. सुब्रमण्यम सभागार, एनएएससी परिसर, पूसा में होगा। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे।
सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्री, केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) तथा कृषि क्षेत्र से जुड़े अन्य हितधारक भाग लेंगे। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य आगामी रबी मौसम के लिए तैयारियों की समीक्षा करने के साथ केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना तथा कृषि उत्पादन, उत्पादकता, स्थिरता और किसानों की आय बढ़ाने के लिए समन्वित एवं परिणाम-उन्मुख रणनीति तैयार करना है।
पहले दिन तीन विषयगत क्षेत्रों में चर्चा
सम्मेलन के पहले दिन तीन व्यापक क्षेत्रों में समानांतर विषयगत चर्चाओं के तीन दौर आयोजित किए जाएंगे। इनमें आत्मनिर्भरता, विविधीकरण एवं उत्पादन वृद्धि; स्थिरता एवं जलवायु-अनुकूल कृषि; तथा डिजिटल कृषि, बुनियादी ढांचा, वित्तपोषण एवं जोखिम प्रबंधन शामिल हैं।
चर्चा के दौरान दलहन, तिलहन और ऑयल पाम में आत्मनिर्भरता के लिए मिशन, बागवानी, कपास, बीजों की उपलब्धता और बीज मूल्य श्रृंखला में सुधार, प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य, कृषि मशीनीकरण, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के लिए वित्तपोषण एवं बुनियादी ढांचा, विपणन सुधार, प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना, किसान क्रेडिट कार्ड कवरेज, डिजिटल कृषि, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, पौध संरक्षण और कृषि सांख्यिकी जैसे विषयों पर विचार-विमर्श होगा।
विषयगत चर्चाओं में रबी मौसम के दौरान सामने आने वाली प्रमुख कार्यान्वयन संबंधी चुनौतियों, राज्यों की प्राथमिकताओं और उनके अनुरूप कार्रवाई योग्य रणनीतियों की पहचान की जाएगी। योजनाओं के बीच बेहतर तालमेल, वितरण तंत्र को मजबूत करने तथा जमीनी स्तर पर प्रभावी परिणाम सुनिश्चित करने पर विशेष जोर रहेगा।
मौसम, उर्वरक और डिजिटल कृषि पर दूसरे दिन मंथन
सम्मेलन के दूसरे दिन क्षेत्रीय कृषि सम्मेलनों से प्राप्त प्रमुख परिणामों तथा पहले दिन हुई विषयगत चर्चाओं के निष्कर्षों पर चर्चा की जाएगी। इस दौरान रबी मौसम के लिए मौसम संबंधी पूर्वानुमान, उर्वरकों की उपलब्धता और उनके संतुलित उपयोग, डिजिटल कृषि मिशन, किसान रजिस्ट्री, डिजिटल फसल सर्वेक्षण और एग्रीस्टैक जैसे विषयों पर विचार होगा।
इसके अलावा दलहन में आत्मनिर्भरता के लिए मिशन, खाद्य तेलों पर राष्ट्रीय मिशन, फसल एवं बीज की स्थिति, उन्नत किस्मों को अपनाने, प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना, विपणन सुधार तथा कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी (एटीएमए) और कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के माध्यम से कृषि योजनाओं को प्रभावी बनाने पर भी चर्चा की जाएगी।
राज्यों को प्राथमिकताएं और सुझाव रखने का अवसर
सम्मेलन में राज्यों के कृषि मंत्रियों को अपने अनुभव, राज्य की कृषि संबंधी प्राथमिकताएं और रबी मौसम की तैयारियों से जुड़े सुझाव साझा करने का अवसर मिलेगा। राज्यों से प्राप्त सुझावों और विषयगत चर्चाओं के निष्कर्षों के आधार पर रबी अभियान 2026 के लिए एक समन्वित और परिणाम-उन्मुख रणनीति तैयार की जाएगी।
उत्पादन बढ़ाने और किसानों को सशक्त बनाने पर जोर
समापन सत्र में सम्मेलन के दौरान हुए विचार-विमर्श का सार प्रस्तुत किया जाएगा और रबी फसलों का उत्पादन बढ़ाने तथा किसानों को सशक्त बनाने के लिए सुदृढ़ कार्ययोजना तैयार करने पर जोर रहेगा। इसका उद्देश्य खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को मजबूत करने के साथ ‘आत्मनिर्भरता एवं विकसित भारतÓ के व्यापक विजन को आगे बढ़ाना है।

