कहीं भारी न पड़ जाय अखिलेश का दाँव

 

जौनपुर। सदर विधानसभा सीट के लिए तेज बहादुर मौर्य उर्फ पप्पू को समाजवादी पार्टी द्वारा प्रत्याशी बना देने से संगठन में भारी नाराजगी दिखाई दे रही है। मालूम हो कि अखिलेश यादव जौनपुर सदर विधानसभा सीट से दीदारगंज के पूर्व विधायक आदिल शेख को उम्मीदवार बनाना चाहते थे और उनका टिकट लगभग कंफर्म भी हो गया था। ठीक उसी समय जौनपुर समाजवादी पार्टी के दो दिग्गज अखिलेश यादव से मिलकर आदिल शेख को बाहरी उम्मीदवार बताते हुए हार जाने का डर दिखाकर विरोध किया। उसके बाद अखिलेश यादव ने बसपा से सपा में आए पप्पू मौर्य को टिकट देकर एक तीर से दो निशाना साधने का प्रयास किए। उनका मानना है की इससे मौर्य बिरादरी का वोट सपा से जुड़ जाएगा जबकि मुसलमानों का वोट तो सपा की जेब में है ही, उसके लिए केवल भाजपा का खौफ पैदा करना ही पर्याप्त है। इस तरह पार्टी मुखिया की नजर में मुस्लिम, यादव और मौर्य बिरादरी के वोटों के समीकरण से पप्पू मौर्य की सीट निकलती हुई दिख रही है। किंतु वर्षों से पार्टी का झंडा लेकर चलने वाले और संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं की उपेक्षा पार्टी के अंदर खाने में भारी नाराजगी का सबब बन गई है। किसी को यह नहीं समझ में आ रहा है की पार्टी मुखिया या तो बाहरी लोगों को उम्मीदवार बनाना चाहते हैं या दूसरे दल से निष्ठा परिवर्तित करके आए हुए लोगों को, आखिरकार सपा के वफादारों के ऊपर अखिलेश ने भरोसा क्यों नहीं जताया? यह यक्ष प्रश्न समाजवादी पार्टी के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के समक्ष अनुत्तरित है।

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