टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत ‘टीबी हारेगा, देश जीतेगा’ को लेकर पूरे एक माह (24 फरवरी से 24 मार्च) तक कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसके तहत टीबी रोग के प्रति जनजागरूकता के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार और संवेदीकरण किया जाएगा। जनपद के सभी धर्मगुरुओं के माध्यम से समुदाय में टीबी के प्रति जनजागरूकता लाने के प्रयास किए जाएंगे।
जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डॉ राकेश कुमार ने बताया कि नौ से 22 मार्च के बीच कुल 10 कार्य दिवसों में जनपद की कुल जनसंख्या के सापेक्ष 20 प्रतिशत आबादी में एक्टिव केस फाइंडिंग अभियान (एसीएफ) चलाया जाएगा। अभियान में टीबी संभावित आबादी के बीच घर-घर टीमों को भेजकर नए टीबी के लक्षण वाले मरीजों को खोजा जाएगा। दो सप्ताह या अधिक समय तक खांसी आना, खांसी के साथ बलगम आना, बलगम में कभी-कभी खून आना, सीने में दर्द होना, शाम को हल्का बुखार आना, वजन कम होना और भूख न लगना टीबी के सामान्य लक्षण हैं। ऐसे लक्षणों वाले लोगों को टीबी की जांच अवश्य करानी चाहिए। जांच में टीबी की पुष्टि होने पर दवा का पूरा कोर्स करने से टीबी से जल्दी से जल्दी मुक्ति मिल सकती है। ऐसे ही मरीजों की अभियान के दौरान खोज की जाएगी। एसीएफ अभियान की सफलता के लिए जनपद के समस्त स्वास्थ्य केंद्रों तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) के सभी अधीक्षकों एवं प्रभारी चिकित्साधिकारियों, अन्य विभागों जिसमें बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार (आईसीडीएस), जिला पंचायत राज, बेसिक शिक्षा के अधिकारियों को 26 फरवरी को टीबी रोग के प्रति संवेदीकरण किया जा चुका है। जनपद में टीबी मरीजों को खोजने के लिए 10.5 लाख की आबादी का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें कुल 420 टीमें लगाईं गईं हैं। इन टीमों में शामिल आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण पांच मार्च तक सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर पूरा कर लिया जाएगा। अभियान के दौरान टीमों की मानीटरिंग एवं सुपरविजन के लिए 84 पर्यवेक्षक, 21 मेडिकल आफिसर ट्यूबरकुलोसिस (एमओटीसी) सहित जनपद के समस्त अपर मुख्य चिकित्साधिकारियों (एसीएमओ) को तैनात किया जाएगा। एसीएफ टीमों की माइक्रोप्लानिंग का कार्य पूर्ण कर लिया गया है।
क्षय उन्मूलन अभियान के जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी) सलिल यादव ने बताया कि अभियान की व्यापक सफलता के लिए जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला क्षय नियंत्रण केंद्र के माध्यम से मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ लक्ष्मी सिंह की अध्यक्षता में जिला टीबी टास्क फोर्स एवं जिला टीबी फोरम की बैठक कर ली गई है। जनपद में पिछला एसीएफ अभियान नवम्बर 2020 में जनपद की कुल 10 प्रतिशत टीबी संभावित आबादी के बीच चलाया गया था, जिसमें 107 नए टीबी मरीजों को खोजने में सफलता मिली थी।
पंजीकरण की स्थिति और डीबीटी के आंकड़ेर –
क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के जिला समन्वयक (डीपीसी) सलिल यादव ने बताया कि वर्ष 2020 में 6,239 क्षय रोगियों का पंजीकरण हुआ है, जिसमें से 4,267 सरकारी अस्पतालों से तथा 1,972 निजी अस्पतालों से हुआ है। वर्ष 2021 में 6,569 क्षय रोगियों का पंजीकरण हुआ जिसमें से 4,644 सरकारी अस्पतालों से तथा 1,925 निजी अस्पतालों के मरीज थे। 14 वर्ष तक के बच्चों का वर्ष 2019 में 346, वर्ष 2020 में 275 तथा वर्ष 2021 में 272 पंजीकरण हुआ है। इस तरह से इन तीन वर्षों में 893 क्षय रोग ग्रसित बच्चों का पंजीकरण हुआ। निक्षय पोषण योजना के तहत वर्ष 2018 में 19.60 लाख रुपए, वर्ष 2019 में 88.77 लाख रुपए, वर्ष 2020 में 2.10 करोड़ रुपए तथा वर्ष 2021 में 1.74 करोड़ रुपए क्षय रोग उपचाराधीन मरीजों के खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के तहत भेजे गए हैं। इस तरह से इन चार वर्षों में करीब 4.92 करोड़ रुपए डीबीटी के माध्यम से भेजे जा चुके हैं।

