
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद तक पहुंचने वाली रीता जोशी के बाद शहर में किसी भी सीट पर कांग्रेस जीत नहीं दर्ज कर सकी। उनके भाजपा में जाने के बाद 2019 में कैंट विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुआ तो यह सीट भी कांग्रेस के हाथ से निकल गई।
कांग्रेस की ओर से दिलप्रीत सिंह डीपी को पार्टी ने चुनाव लड़ाया, मगर भाजपा के सुरेश तिवारी चुनाव जीत गए। वहीं राजधानी में इस बार के चुनाव में जहां पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली, वहीं वोट प्रतिशत भी कम हुआ। जबकि उम्मीद लगाई जा रही थी कि यूपी की कमान प्रियंका के हाथों में आने के बाद जिस तरह से कई मुद्दों पर कांग्रेस सड़क पर आई, उससे वोट प्रतिशत तो जरूर बढ़ेगा।
हालांकि 1989 से पहले यह स्थित नहीं थी। शहर की चारों सीट पर कांग्रेस का ही कब्जा रहता था। पुराने कांग्रेसी और पार्टी के पूर्व प्रदेश महासचिव व पांच बार से लगातार पार्षद गिरीश मिश्र बताते हैं कि पहले शहर में चार सीटें होती थीं, जिसमें सभी पर कांग्रेस का ही कब्जा रहता था। 1989 के बाद स्थिति बिगड़ी है। हालांकि पश्चिम विधानसभा सीट पर 2009 में हुए उप चुनाव में कांग्रेस के श्याम किशोर शुक्ला विजयी हुए थे।
उन्होंने भाजपा के आशुतोष टंडन गोपाल को हराया था। उसके बाद जब विधानसभा चुनाव 2012 में हुए तो एकमात्र सीट कांग्रेस को मिली, जो रीता ने भाजपा के सुरेश तिवारी को हराकर जीती थी। उसके बाद 2017 में विधानसभा चुनाव में फिर कांग्रेस से जोशी ने ही जीत दर्ज की। इस बार उन्होंने सपा की अपर्णा यादव को हराया था, जो अब भाजपा में शामिल हो गई हैं।

