
पाली-हरदोई कस्बा पाली के सेठ बाबूराम भारतीय इण्टर कालेज में बुद्ध पूर्णिमा पर्व के सुअवसर पर भगवान गौतम बुद्ध का जन्मदिन हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सर्वप्रथम अंग्रेजी प्रवक्ता विजेता आर्य ने भगवान बुद्ध की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर किया।तत्पश्चात विद्यालय स्टॉफ सहित छात्र/छात्राओं ने भगवान बुद्ध की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किये। कार्यक्रम के अवसर पर भूगोल प्रवक्ता विनोद प्रताप वर्मा ने भगवान बुद्ध के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि बुद्ध पूर्णिमा का पर्व हर साल वैशाख माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। माना जाता है कि इसी दिन गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था। हिन्दू मान्यता के अनुसार, सभी महीनों में वैशाख का महीना भगवान विष्णु को भी अत्यंत प्रिय है। इसी दिन 563 ईसा पूर्व नेपाल के लुम्बिनी नामक स्थान पर गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था। इनके माता-पिता का नाम राजा शुद्धोधन और मायादेवी था। वह कपिलवस्तु में एक राज घराने में पले- बढ़े। कहा जाता है कि सांसारिक सुखों से विरक्त होकर उन्होंने गया में बरगद के पेड़ के नीचे 49 दिनों तक लगातार तपस्या की थी। 49वें दिन ज्ञान प्राप्त होने के कारण बोधिसत्व कहलाये। भगवान बुद्ध भारत की सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर है।उनका समग्र जीवन दर्शन मानवीय कल्याण के हितार्थ ज्ञान की खोज के लिये मात्र 29 वर्ष की आयु में परम वैभव के साम्राज्य और सांसारिक सुखों के आकर्षण के परित्याग की पराकाष्ठा है। इनके बचपन का नाम सिद्धार्थ था। जिसका अर्थ है अभिलाषा का पूर्ण हो जाना क्योंकि उनके जन्म से सभी की अभिलाषाएं पूर्ण हुई इसलिए उनका नाम सिद्धार्थ रखा गया। भगवान बुद्ध ने कहा कि मैं ही सभी चीजों का केंद्र बिंदु है वही सब का मूल है मालिक है कारण है। मन ही शासन करता है योजना बनाता है।यदि आदमी का मन शुद्ध होता है तो वह शुद्ध वाणी बोलता है अच्छे कार्य करता है। मन काबू में है तो सब कुछ काबू में है। इसलिए मुख्य बात मन की साधना है। अपने चित्त को निर्मल बनाये रखना ही धर्म का सार है। अंग्रेजी प्रवक्ता विजेता आर्या ने भगवान बुद्ध के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भगवान बुद्ध ने कहा था कि मैं ऐसे किसी सिद्धांत को स्वीकार नहीं कर सकता जिसमें सैकड़ों बातों को यूं ही पहले से ही सही मानकर चलना होता है।उनका दृढ़ विश्वास था कि हर व्यक्ति के भीतर अच्छा इंसान बनने की संभावनाएं होती हैं बशर्ते उस पर विश्वास कर उसे समुचित अवसर परिस्थितियां प्रदान की जायें और उन्होंने बताया कि पाली में एक कहावत है कि सूर्य केवल दिन में चमकता है और चंद्रमा रात में लेकिन बुद्ध अपने तेजस्वी व्यक्तित्व से दिन -रात हर समय प्रकाशित रहते हैं।वे समस्त लोक के प्रकाश स्तंभ अर्थात भुवनप्रदीप थे। उनके विचारों की उपादेयता संदेह से परे है।हिंदी के प्रवक्ता राजेश प्रकाश मिश्रा ने शांति और अहिंसा के दूत भगवान बुद्ध को नमन करते हुए उनके जीवन पर प्रकाश डाला। इस मौके पर विद्यालय का समस्त स्टॉफ व छात्र/छात्रायें मौजूद रहे।

