शिया धर्मगुरु मुक्तदा अल-सद्र के समर्थकों ने मंगलवार को संसद भंग करने को लेकर उग्र प्रदर्शन किया। इसे लेकर इराक की न्यायपालिका को अपनी कार्रवाई निलंबित करनी पड़ी। शिया मौलवी के दर्जनों समर्थकों ने इससे पहले बगदाद के अति-सुरक्षित ग्रीन जोन में रैली की और सर्वोच्च न्यायिक परिषद तथा संसद भवन के बाहर प्रदर्शन किया। इस बीच पीएम मुस्तफा अल-कदीमी ने सभी पक्षों से शांत रहने और राष्ट्रीय वार्ता की अपील दोहराई।
न्यायपालिका ने इसे देश के सबसे खराब राजनीतिक संकटों में से एक बताया है। जुलाई के अंत में भी शिया मौलवी के समर्थकों ने संसद पर धावा बोलते हुए वहां लगातार विरोध प्रदर्शन किया था। इसे देखते हुए कार्यवाहक पीएम मुस्तफा अल-कदीमी ने पिछले सप्ताह वरिष्ठ सियासी नेताओं और पार्टी प्रतिनिधियों की एक बैठक बुलाई लेकिन अल-सद्र की पार्टी ने इसमें हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने मंगलवार को एक बार फिर नए सिरे से वार्ता की पेशकश की।
अल-सद्र समर्थकों ने न्यायपालिका को धमकाया
बगदाद में मंगलवार को सर्वोच्च न्यायिक परिषद और संघीय सुप्रीम कोर्ट के मुख्यालय के बाहर धार्मिक नेता मुक्तदा अल-सद्र के समर्थक विरोध प्रदर्शन के लिए जुटने लगे। न्यायपालिका ने एक बयान में कहा कि समर्थकों ने उसे फोन पर धमकाते हुए कहा, हम मौजूदा असांविधानिक व्यवहार के विरोध में अदालती सत्र को निलंबित कर देंगे और इस कदम का समर्थन करने वाली सरकार व सियासी दलों को सभी नतीजों के लिए जिम्मेदार ठहराएंगे।
न्यायिक परिषद के बाहर तंबू लगाए
शिया मौलवी के समर्थकों ने सवोच्च न्यायिक परिषद के बाहर तंबू गाड़े और अधिकारियों से संसद भंग करने व देश में जल्द संसदीय चुनाव कराने की मांग करने लगे। उन्होंने अपने हाथ में भ्रष्टाचार से निपटने के बैनर भी लिए हुए थे।

