किसी भी शहर के चौराहों पर सिग्नल के लाल होते ही गाडि़यों के शीशे खटखटाते नन्हें हाथों की तस्वीर बहुत आम है। छोटे-छोटे ये बच्चे कभी हाथ फैलाकर भीख मांग रहे होते हैं तो कोई छोटा-मोटा सामान बेच रहे होते हैं। हम और आप भी रोजाना इन्हें देखते हैं लेकिन चुपचाप आगे बढ़ जाते हैं। हम लोगों के मन में कोई सवाल नहीं उठता कि आखिर इनका भी तो बचपन है, इन्हें भी शिक्षा पाने, खेलने-कूदने, अच्छे भोजन और समुचित संरक्षण की जरूरत है। आखिर कौन हैं ये बच्चे? दरअसल, ये बच्चे बेघर हैं। इनमें से कुछ मजबूरी में भीख मांगते हैं, तो कुछ अपने ही मां-बाप या रिश्तेदारों के कहने पर। हालांकि ये तय नहीं होता कि मां-बाप या रिश्तेदार वास्तव में असली हैं। कुछ बच्चे गिरोह के चंगुल में फंसे होते हैं। कई बार ये भी होता है कि केवल भीख मंगवाने का धंधा करने के लिए बच्चों को चोरी किया जाता है।
अगर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की ही बात करें तो यहां करीब 60 हजार बच्चे बेघर हैं जो किसी न किसी कारण भीख मांगने को अभिशप्त हैं। अब दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार व दिल्ली सरकार से भीख मांग रहे इन बच्चों को लेकर जवाब मांगा है। उम्मीद है कि सरकारें अब जमीनी स्तर पर कुछ करने का प्रयास करेंगी और इन बच्चों को भी भीख मांगने के अभिशाप से मुक्ति मिलेगी।

