बिखर चुकी है हवेली की ईंट ईंट मगर,
वो शख्स आज भी कैद ए अना मैं रहता है:- डॉ वसी बेग”बिलाल”अलीग
ब्यूरो चीफ आर एल पाण्डेय
अलीगढ़ ।
डॉ. मुजीब शेज़र के आवास पर दो युवा कवियों अली खान और कादिर खितोरवी के सम्मान में एक शायरी नाशिस्ट का आयोजन किया गया। शायरी नाशिस्ट की अध्यक्षता डॉ.मोहम्मद वसी बेग “बिलाल” अलीग ने की। मुख्य अतिथि शायर अली खां जौहर थे। सम्मानित अतिथि कवि कादिर खितोरवी थे। विशिष्ट अतिथि शायर शाकिर अलीगढी थे। जिन अन्य कवियों ने अपनी कविताएँ सुनाईं, वे थे डॉ. मुजीब शेज़र, आतिफ़ शेख और फ़राज़ मुजीब। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मुजीब शेज़र ने किया।
शाकिर अलीगढ़ी का अंदाज बयां कुछ इस तरह था”जाने वाले कहां खो गया काश होता तुझे यह पता,तेरे कदमों के ढूंढे कोई धुंधले,धुंधले निशा आज तक”
डॉ मोहम्मद वसी बेग “बिलाल” अलीग ने सुनाया”बिखर चुकी है हवेली की ईंट ईंट मगर,
वो शख्स आज भी कैद ए अना मैं रहता है”
अली खान जोहार ने इस तरह अपना भाव व्यक्त किया”क्या तेरी दुनिया में ऐसा भी मुसव्विर
है खुदा
जो मेरा दर्द भी खींचे मेरी तस्वीर के साथ”
कादिर किट्ठोरवी ने प्यार का इजहार कुछ इस तरह किया”कुछ ऐसा करना है हमको प्यार में ए दिलरुबा
दुनिया वाले तुझको शम्मा मुझको परवाना कहें”
मोहम्मद फराज मुजीब मैं हादसों पर अपना दर्द बयां किया”हादसों की जगह आप कौन ठहरता है फ़राज़
लोग वीडियो बनाते हैं गुजर जाते हैं”
आतिफ शेख ने सुनाया”आज गुलशन में गर लगाओगे
जद में तुम भी जरूर आओगे”
डॉक्टर मुजीब शहजर नए आधुनिकता पर कटाक्ष किया”भाई ने भाई के जख्मों पर दवा रखी थी
आज की बात न कर पिछले जमाने होंगे”

