नैतिकता, मूल्यों और खेल भावना का प्रतीक* (सरस्वती डेंटल रजत जयंती)

*नैतिकता, मूल्यों और खेल भावना का प्रतीक*
(सरस्वती डेंटल रजत जयंती)

ब्यूरो चीफ आर एल पाण्डेय

लखनऊ। महीने भर चलने वाली रजत जयंती के 12वाँ दिन रमन और कृष्णन के बीच लड़कियों के क्रिकेट मैच के फाइनल के साथ समारोह आज जारी रहा। मैच के अंपायर डॉ.हिमांशु चौहान और अक्षत तिवारी थे। कृष्णन ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया लेकिन वे 10 ओवर में केवल 60 रन ही बना सके। रमन टीमों की गेंदबाजी बेहद शानदार रही और गेंदबाजों ने 10 ओवर में कृष्णन प्लेयर्स के सभी 10 विकेट लिए। इसके बाद बल्लेबाजी करते हुए रमन हाउस ने सिर्फ 5 ओवर में 63 रन बनाकर शानदार जीत हासिल की। कृष्णन हाउस के खिलाड़ी जोएल, किंजल, आर्यांशी, अंशिका, दिव्या, किरण, ध्रुवितिका, रैना, मुक्ता यशस्वी, मुस्कान, फारिया थे। रमन हाउस के खिलाड़ी-डॉ.शैफाली, तहरीम, अनन्या, भारती, रिया, अनुष्का राय, प्रतिभा, जीनत, अनुकृति, प्रशंसा, दीप्ति, साइमा।

ओवरऑल प्रदर्शन के लिए वुमन ऑफ द मैच तहरीम नाज़ रहीं|सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज-अनुकृति जिन्होंने 38 रन बनाए और सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज प्रशंसा जिन्होंने 3 ओवर में 4 विकेट लिए।

आज का साहित्यिक आयोजन था वाद-विवाद (हिन्दी)। विषय था “*क्या वर्तमान शिक्षा युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करती है या नहीं?”*

कार्यक्रम के निर्णायक थे डॉ सौम्या नवित,डॉ ए.के.श्रीवास्तव और डॉ. श्वेता सिंह. उपस्थित शिक्षक-डॉ.सीमा, डॉ.शैफाली, डॉ.मीनाक्षी एवं डॉ.अजय पालीवाल।

प्रत्येक सदन का प्रतिनिधित्व 2 प्रतिभागियों द्वारा किया गया। एक प्रस्ताव के पक्ष में और एक प्रस्ताव के विरोध में। आवंटित समय 3+1 मिनट था। इसके बाद सवाल जवाब का दौर भी हुआ।
चावला सदन का प्रतिनिधित्व मधुर अग्रवाल (प्रस्ताव के पक्ष में) और श्वेता यादव (प्रस्ताव के विरुद्ध) ने किया, रमन सदन का प्रतिनिधित्व समीक्षा झा (प्रस्ताव के पक्ष में) और शगुन पटेल (प्रस्ताव के विरुद्ध) ने किया, कृष्णन सदन का प्रतिनिधित्व वर्तिका श्रीवास्तव ने किया (प्रस्ताव के पक्ष में) एवं डॉ. प्रज्जवल श्रीवास्तव (प्रस्ताव के विरुद्ध) एवं टैगोर हाउस द्वारा वैभव मिश्रा (प्रस्ताव के पक्ष में) एवं डॉ. गौरव चौधरी (प्रस्ताव के विरुद्ध) परिणाम इस प्रकार रहे तृतीय स्थान – शगुन पटेल द्वितीय स्थान – वर्तिका श्रीवास्तव प्रथम स्थान प्राप्त किया डॉ. प्रज्ज्वल श्रीवास्तव द्वारा

आज की जानकारी *वृद्धावस्था मौखिक स्वास्थ्य देखभाल*
बुढ़ापा, जीवन का एक सामान्य हिस्सा है। इसे एक सामान्य, अटल जैविक घटना के रूप में देखा जाना चाहिए। *सरस्वती डेंटल कॉलेज एवं अस्पताल के प्रॉसथोडॉन्टिक्स विभाग के प्रोफेसर एवं हेड डॉ. देवेंद्र चोपड़ा* कहते हैं, “वैश्विक बूढ़े जनसंख्या में वृद्धि हो रही है और दुर्भाग्यवश, बूढ़े व्यक्तियों में दंत स्वास्थ्य कभी-कभी शारीरिक स्थितियों के दिन प्रतिदिन बिगड़ रहे होने और पूर्ववर्ती दंत रोगों के कारण होने वाले संचित क्षति के कारण कमजोर हो सकता है।”
भारत में, हमारे समुदाय को बूढ़े वयस्कों के ओरल हेल्थ के साथ अब भी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है क्योंकि अधिकांश लोग अपनी दन्त स्वास्थ्य और शारीरिक स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही करते हैं। सरस्वती डेंटल कॉलेज एवं अस्पताल में प्रॉसथोडॉन्टिक्स विभाग में एक समर्पित जेरिएट्रिक इकाई है, जहां एक विशेषज्ञ टीम ने वर्तमान और भविष्य की जेरिएट्रिक मौखिक स्वास्थ्य की समस्याओं को सबसे प्रभावी रूप से कैसे संबोधित किया जा सकता है, इसके लिए एक रोड मैप विकसित किया है। इसके अलावा, बूढ़े रोगीयों को उनके ओरल और समग्र स्वास्थ्य देखभाल के परिणामों के बारे में प्रेरणात्मक परामर्श प्राप्त होता है।

सरस्वती डेंटल कॉलेज ने अपनी स्थापना के बाद से 35 लाख से अधिक रोगियों का इलाज किया है और, न्यूनतम दरों पर गुणवत्तापूर्ण उपचार प्रदान करना जारी रखा है। संकाय और छात्र दंत चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल के उच्चतम मानकों के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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