श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

19 जनवरी – श्रीरामचरितमानस,
नमो राघवाय 🙏

जानहुँ राम कुटिल करि मोही।
लोग कहउ गुर साहिब द्रोही ।।
सीता राम चरन रति मोरें ।
अनुदिन बढउ अनुग्रह तोरें ।।
( अयोध्याकाण्ड 204/1)
राम राम 🙏🙏
भरत जी राम जी को मनाने के लिए चित्रकूट जाते हुए प्रयाग पहुचते हैं तथा त्रिवेणी के दर्शन करते हैं । तीर्थराज प्रयाग से वे विनती करते हुए कहते हैं कि राम जी चाहे मुझे कुटिल ही क्यू न कहें , लोग मुझे गुरू व स्वामिद्रोही कहें पर सीताराम जी के चरणों में मेरा प्रेम आपकी कृपा से दिन प्रतिदिन बढ़ता रहे ।
हमारे सारे प्रयास राम प्रेम बढ़ाने वाले होने चाहिए । किसी से कुछ माँगना भी पड़े तो राम प्रेम बढ़ाने में मदद व उसका आशीर्वाद माँगें । राम प्रेम बढ़ते ही जीवन में आपका सब कुछ स्वत: बढ़ जाएगा । अतएव , राम माँगें , राम प्रीति माँगे , राम जी से भी राम माँगे अथ ! राम राम , राम राम , जय राम राम 🚩🚩🚩

संकलनकर्ता तरूण जी, लखनऊ

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