13 फरवरी – श्रीरामचरितमानस,
नमो राघवाय 🙏
सुखी मीन जे नीर अगाधा
जिमि हरि सरन न एकउ बाधा ।।
फूलें कमल सोह सर कैसा ।
निर्गुन ब्रह्म सगुन भएँ जैसा ।।
( किष्किंधाकांड 16/1)
राम राम 🙏🙏
सुग्रीव को राजा बनाकर राम जी वर्षा ऋतु में प्रवर्षन पर्वत पर निवास कर रहें हैं । राम जी लक्ष्मण को वर्षा ऋतु बीतने पर प्रकृति की स्थिति बता रहें हैं । वे कहते हैं कि जो मछलियाँ अगाध जल में हैं , वे सुखी हैं जैसे भगवान की शरण में चले जाने पर एक भी बाधा नहीं रहती है । कमलों के खिलने से तालाब कैसी शोभा दे रहा है जैसे निर्गुण ब्रह्म सगुण होने पर शोभित होता है ।
भगवान असीमित हैं , अमित हैं , अपार हैं जबकि हम आप सीमित हैं । जो वस्तु हमारे पास अधिक होती है उसकी हमें चिंता नहीं होती है उसी तरह असीमित भगवान की शरण में रहने पर हम आप निश्चिंत हो जाते हैं और सुखी जीवन जीते हैं तथा शोभायमान हो जाते हैं । अस्तु सुखी व शोभायमान होना चाहते हैं तो राम जी की शरण लें , राम शरण में रहें । अथ ! जय जय राम शरण , जय रघुनाथ शरण 🚩🚩🚩
संकलन तरुण जी लखनऊ

