21 फरवरी – श्रीरामचरितमानस,
नमो राघवाय 🙏
भेंटीं रघुबर मातु सब
करि प्रबोधु परितोषु ।
अंब ईस आधीन जगु
काहु न देइअ दोषु ।।
( अयोध्याकाण्ड, दो. 244)
राम राम 🙏🙏
भरत जी ने चित्रकूट आकर राम जी से भेंट की है । केवट ने राम जी को बताया कि वशिष्ठ जी के साथ सब माताएँ आई हैं ।राम जी शत्रुघ्न को सीता जी के पास छोड़कर सबसे मिलने चले हैं । गुरु जी से मिलकर राम जी ने सब माताओं से भेंट की है । सबको राम जी ने समझाया व संतोष दिलाया है कि माता ! जगत ईश्वर के अधीन है । यहाँ किसी को दोष नहीं देना चाहिए ।
इस जगत के नियन्ता जगदीश हैं और हमें अपने जगदीश के अनुरूप ढाल लेना चाहिए , जगदीश के साथ तालमेल बिठा लेना चाहिए फिर हमारे मन में किसी को दोष देने का विचार नहीं आएगा । अतएव राम जी में लगें, राम जी में ही रहें । अथ ! राम राम जय राम राम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

