25 फरवरी – श्रीरामचरितमानस,
नमो राघवाय 🙏
पूरुब कल्प एक प्रभु
जुग कलिजुग मल मूल ।
नर अरु नारि अधर्मरत
सकल निगम प्रतिकूल ।।
( उत्तरकांड, दो. 96)
राम राम 🙏🙏
गरुड़ महराज को अपने मोह की कथा सुनाने के बाद काकभुसुंडि जी गरुड़ जी के यह पूछने पर यह कौए का शरीर व रामचरित आपने कैसे पाया , काकभुसुंडि जी अपने पहले जन्म की कथा सुनाते हैं । वे कहते हैं कि पूर्व के एक कल्प में पापों का मूल कलियुग था जिसमें पुरुष व स्त्री सभी अधर्मपरायण और वेद के विरोधी थे।
इस समय कलियुग ही चल रहा है । चारों तरफ़ पाप का ही फैलाव है । अब भी सारे स्री व पुरूष धर्म का पालन नहीं कर रहें हैं न ही वेदों को मानते हैं । राम जी धर्म हैं । वही धर्मरत हैं जो राम जी को मानते हैं । अतएव ! ऐसे समय में सुखमय होना चाहते हैं तो धर्ममय हो जाए , राममय हो जाएँ । अथ ! जय जय राम, जय जय जय राम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

