श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

21 मार्च – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

बचन सुनत सुरगुरु मुसकाने ।
सहसनयन बिनु लोचन जाने ।।
मायापति सेवक सन माया ।
करइ त उलटि परइ सुरराया ।।
( अयोध्याकाण्ड 217/1)
राम राम 🙏🙏
भरत जी राम जी मिलने तीर्थराज प्रयाग से आगे चलते हैं । प्रकृति भरत के अनुकूल हो गई , बादल छाया किए हुए हैं , सुखद हवा बह रही है , मार्ग सुखदायक हो गया है । यह सब देखकर देवराज इंद्र सोच में पड़ जाते हैं तथा बृहस्पति गुरु से कहते हैं कि कुछ छल पूर्ण उपाय करें जिससे राम भरत की भेंट न हो । गुरु बृहस्पति ने इंद्र को अज्ञानी माना है और कहा कि देवराज! मायापति के सेवक के साथ छल करना उल्टा पड़ जाता है ।
राम सेवक पर किसी भी छल कपट का प्रभाव नहीं पड़ता है । उसके साथ वैर रखने वाला स्वयं परेशान रहता है कारण उसकी देखभाल स्वयं उसके स्वामी करते हैं । अतएव जगत के छल कपट से अप्रभावित रहना है तो राम सेवक बनें, सच्चे सेवक बनें । अथ ! श्रीराम जय राम जय जय राम 🚩🚩🚩

संकलन तरूण जी लखनऊ

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *