भगवान परशुराम का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया ,
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मेंहनगर ,(आजमगढ़ ): जनपद मुख्यालय से 25 किमी0 दूरी पर स्थित ग्राम करौती श्री गिरीश्वर महादेव मंदिर परिसर में व्राह्मण समाज शिव राम परिवार के तत्वावधान में भगवान परशुराम के जन्मोत्सव पर आचार्य पं0 राम मिलन पांडेय द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच विधि विधान पूर्वक पूजा अर्चना के पश्चात उपस्थित लोगों ने उनके चित्र पर माल्यार्पण किया , ततपश्चात प्रसाद वितरण हुआ ,इस दौरान उपस्थित लोगों को सम्बोधित करते हुए सेवा निवृत्त प्रशासनिक अधिकारी पं0 गिरीश चतुर्वेदी ने कहा कि परशुराम को शास्त्रों की शिक्षा दादा ऋचीक, पिता जमदग्नि तथा शस्त्र चलाने की शिक्षा अपने पिता के मामा राजर्षि विश्वमित्र और भगवान शंकर से प्राप्त हुई। च्यवन ने राजा शर्याति की पुत्री सुकन्या से विवाह किया। परशुराम योग, वेद और नीति में पारंगत थे। ब्रह्मास्त्र समेत विभिन्न दिव्यास्त्रों के संचालन में भी वे पारंगत थे। उन्होंने महर्षि विश्वामित्र एवं ऋचीक के आश्रम में शिक्षा प्राप्त की।
परशुराम के शिष्य : त्रैतायुग से द्वापर युग तक परशुराम के लाखों शिष्य थे। महाभारतकाल के वीर योद्धाओं भीष्म, द्रोणाचार्य और कर्ण को अस्त्र-शस्त्रों की शिक्षा देने वाले गुरु, शस्त्र एवं शास्त्र के धनी ॠषि परशुराम का जीवन संघर्ष और विवादों से भरा रहा है।
कार्यक्रम का अध्यक्षता प्रधान संतोष चतुर्वेदी पथरु बाबा , संचालन पं0 जयप्रकाश चतुर्वेदी ने किया , इस दौरान पं0 अशोक चौबे ,सुधाकर चौबे , हरि बाबा ,रत्नसेन चौबे ,अखिलेश चतुर्वेदी ,परितोष चतुर्वेदी ,राकेश चतुर्वेदी ,मंगल चतुर्वेदी ,नागेंद्र चौबे सहित तमाम लोग उपस्थित रहे।

