12 जुलाई- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

राम भगति निरुपम निरूपाधी ।
बसइ जासु उर सदा अबाधी ।।
तेहि बिलोकि माया सकुचाई ।
करि न सकइ कछु निज प्रभुताई
( उत्तरकांड 115/3-4)
राम राम 🙏🙏
गरूड महराज जी को भक्ति के बारे में बताते हुए काकभुसुंडि जी कहते हैं कि राम जी सदा भक्ति के अनुकूल रहते हैं । राम जी की विशुद्ध भक्ति जिसके भी ह्रदय में बिना किसी बाधा के बसती है , उसे देखकर माया संकोच कर जाती है तथा उस पर अपना कुछ भी प्रभाव नहीं दिखा पाती है ।
राम जी को भक्ति पसंद है जबकि जीव को माया लुभाती है फिर परेशान करती है । यदि राम भक्ति हमारे ह्रदय में बस जाए तो माया जनित परेशानी से हमें मुक्ति मिल सकती है । अतएव विशुद्ध राम भक्ति करें । अथ जय जय राम भगति , जय सीताराम भगति 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

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