03 अगस्त – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
सरूज सरीर बादि बहु भोगा ।
बिनु हरिभगति जायँ जप जोगा ।
जायँ जीव बिनु देह सुहाई ।
बादि मोर सबु बिनु रघुराई ।।
( अयोध्याकाण्ड 177/3)
राम राम 🙏🙏
दशरथ जी की अंतिम क्रिया कर वशिष्ठ जी ने सभा बुलाकर भरत जी को अयोध्या का राज्य सम्हालने को कहते हैं । भरत जी इसके उत्तर में कहते हैं कि जैसे रोगी शरीर के लिए नाना प्रकार के भोग बेकार हैं , भगवान की भक्ति के बिना जप व योग ब्यर्थ हैं , प्राण बिना सुंदर शरीर किसी काम की नहीं है उसी तरह राम जी के बिना मेरा सब कुछ बेकार है ।
जिसके जीवन में राम नहीं हैं उनसे पूछिए कि उनका जीवन कैसा है ? राम हैं तो जीवन में रौनक़ है अन्यथा जीवन उदास निराश है । राम हैं तो सब कुछ है । अस्तु अपने में राम रखें, सब कुछ अच्छा रहेगा अन्यथा सब बेकार है । अथ ! जय जय राम , जय जय राम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

