श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

18 अगस्त- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

आपन रूप देहु प्रभु मोही ।
आन भाँति नहिं पावौं ओही।।
जेहि बिधि नाथ होई हित मोरा ।
करहु सो बेगि दास मैं तोरा ।।
( बालकांड 131/3-4)
राम राम 🙏🙏
नारद जी के अभिमान होते ही भगवान ने उसे समाप्त करने का निश्चय किया है और अपनी माया का खेल दिखाया है । नारद जी शीलनिधि की कन्या को पाने के लिए छटपटाते हैं , वे भगवान से प्रार्थना करते हैं , भगवान प्रकट हो जाते हैं । नारदजी भगवान से उनका रूप माँगते हैं और कहते हैं कि अन्य किसी प्रकार मैं उस कन्या को पा नहीं सकता हूँ । हे नाथ ! जैसे भी मेरा हित हो आप वैसा शीघ्र करें , मैं आपका दास हूँ ।
नारद जी ने कहा कि प्रभु जैसे भी मेरा हित हो आप वैसा करें तो नारद जी का हित हो गया । हमारा आपका हित इसलिए नहीं हो रहा है कारण भगवान से हम आप अपने ढंग से हित करने के लिए प्रार्थना करते हैं । अस्तु! भगवान से केवल प्रार्थना करें । श्रीराम चंद्र कृपालु भज मन , श्रीराम चंद्र कृपालु भज मन 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

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