23 सितम्बर- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
सुखी मीन जे नीर अगाधा ।
जिमि हरि सरन न एकउ बाधा ।।
फूलें कमल सोह सर कैसा ।
निर्गुन ब्रह्म सगुन भएँ जैसा ।।
( किष्किंधाकांड 16/1)
राम राम 🙏🙏
सुग्रीव को राजा बना कर राम जी लक्ष्मण के साथ पावस ऋतु में प्रवर्षण पर्वत पर वास कर रहें हैं । राम जी लक्ष्मण को वर्षा ऋतु के बारे में बताते हुए कहते हैं कि वे मछलियाँ जो अगाध जल में हैं , वे उसी तरह से सुखी हैं जैसे भगवान की शरण ले लेने पर एक भी बाधा नहीं रहती है । कमलों के फूलने पर तालाब कैसी शोभा दे रहा है जैसे निर्गुण ब्रह्म सगुण होने पर शोभित होता है ।
जैसे निर्गुण ब्रह्म सगुण होने पर शोभित होता है , उसी तरह इस जगत में ईश्वर अंश जीव राम भक्ति से युक्त होने पर शोभित हो जाता है । अतएव इस जगत में राम शरण में राम भक्ति करते हुए हम आप भी सुशोभित हो सकते हैं । अथ ! जय जय राम, जय जय राम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

