24 सितम्बर – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
बचन कायँ मन मम गति जाही
सपनेहुँ बूझिअ बिपति कि ताही
कह हनुमंत बिपति प्रभु सोई
जब तव सुमिरन भजन न होई ।।
( सुंदरकांड 31/1-2)
राम राम 🙏🙏
हनुमान जी सीता जी का पता लगाकर आते हैं , राम जी को सब बताते हैं और कहते हैं कि उनका एक एक पल एक एक कल्प के समान बीत रहा है , आप जल्दी चलें व निसाचरो को मार कर उन्हें ले आइए । राम जी हनुमान जी से पूछते हैं कि जो मन , वचन व कर्म से मेरे में लगा हो क्या उसे स्वप्न में भी विपत्ति पड़ सकती है । हनुमान जी कहते हैं कि प्रभु ! विपत्ति तो तभी पड़ जाती है जब आपका सुमिरन भजन नही होता है ।
प्रभु के सुमिरन व भजन से आप अपनी विपत्ति टाल सकते हैं । जिसने भी सुमिरन किया , जिसने भी भजन किया , वह विपत्तियों से दूर रहा । अस्तु हम आप भी अपना राम सुमिरन , राम भजन बढ़ा कर जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति पा सकते हैं । अस्तु रे मन ! राम भज , राम भज 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

