श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

29 सितम्बर- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

मोहि भगत प्रिय संतत,
अस बिचारि सुनु काग ।
कायँ बचन मन मम पद
करेसु अचल अनुराग ।।
( उत्तरकांड, दो. 85)

राम राम 🙏🙏
राम जी ने काकभुसुंडि जी का मोह दूर कर भक्ति का वर प्रदान किया है । राम जी कहते हैं कि काकभुसुंडि सुनिए ! मुझे भक्त निरंतर प्रिय हैं, ऐसा विचारकर शरीर , वाणी व मन से मेरे चरणों में अटल प्रेम करना ।
राम जी को भक्त सदा प्रिय हैं , ऐसा जानने के बाद भी हम आप राम जी की प्रियता नहीं पा सके, कारण हमारा राम प्रेम अटल नहीं है । हाँ , जगत के प्रति तो हमारा प्रेम अटल है तभी बचपन से लेकर मरते तक जगत जुटाने में लगे रहते हैं । सतत राम प्रेम चाहते हैं तो राम चरणों में सचल नहीं अटल प्रेम करें । अथ ! जय राम जय राम जय जय राम 🚩🚩🚩
तरूण जी लखनऊ

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