7 अक्टूबर – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
रामचंद्र गुन बरनैं लागा ।
सुनतहिं सीता कर दुख भागा ।।
लागीं सुनैं श्रवन मन लाई ।
आदिहु ते सब कथा सुनाई ।।
( सुंदरकांड 12/3)
राम राम 🙏🙏
लंका में हनुमान जी विभीषण के महल जाते हैं , उनसे परिचय होता है , विभीषण अपनी ब्यथा बताते हैं , हनुमान जी उन्हें ढाढ़स देकर सीता जी के पास आकर राम नाम अंकित मुद्रिका गिरा देते हैं । सीता जी उसे पाकर चकित होती है तभी हनुमान जी राम जी के गुणों का वर्णन करने लगते हैं जिसे सुनते ही सीता जी का दुख दूर हो जाता है । वे कान व मन लगाकर राम जी के गुणों को सुनने लगी ।हनुमान जी ने शुरू से लेकर अब तक की सारी कथा सुना डाली ।
राम नाम दुख नाशक है , राम कथा पीड़ा हरण करने वाली है , ज़रूरत है इसे कान व मन लगाकर सुनने की । जिसने भी राम जी के गुणों को कान व मन लगाकर सुना , वह सुखी हो गया । अत: मन लगाकर राम सुनें , राम गुणगान सुनें । अथ ! जय राम, जय राम, जय जय राम 🚩🚩🚩

