8 नवम्बर- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
प्रबिसि नगर कीजे सब काजा ।
हृदयँ राखि कोसलपुर राजा ।।
गरल सुधा रिपु करहिं मिताई ।
गोपद सिंधु अनल सितलाई ।।
गरूड़ सुमेरु रेनु सम ताही ।
राम कृपा करि चितवा जाही।।
( सुंदरकांड 4/1-2)
राम राम 🙏🙏
सागर पार कर हनुमान जी ने लंका में प्रवेश किया है, लंकिनी ने मार्ग रोका है, उसे सत्संग की प्राप्ति होती है । वह कहती हैं कि अयोध्या नरेश राम जी को हृदय में धारण कर लंका में प्रवेश कर सारे काम संपन्न कीजिए । राम जी जिस पर एक बार कृपा करके देख भर लेते हैं उसके लिए विष अमृत , शत्रु मित्र, सागर गोमाता के खुर बराबर, व अग्नि शीतलता देने वाली हो जाती है ।
जीवन की सारी प्रतिकूलता अनुकूलता में बदल जाती है जब राम जी की कृपा दृष्टि पड़ जाती है । प्रश्न यह है कि राम जी की कृपा दृष्टि कब पड़ती है , समझ में यही आता है कि जब तक आप अपने काम में लगे हैं तब तक उनकी कृपा नहीं मिलती है परंतु राम काज में लगते ही उनकी कृपा दृष्टि प्राप्त होने लगती है । अतएव राम काज में लगें । अथ ! जय राम ,जय राम ,जय जय राम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

