27 नवम्बर- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
बार बार बर मागउँ
हरषि देहु श्रीरंग ।
पद सरोज अनपायनी
भगति सदा सत्संग ।।
( उत्तरकांड, दो. 14)
राम राम 🙏🙏
राम जी के राज्याभिषेक होने पर चारों वेदों ने वंदी रूप में राम जी की वंदना की है। उसके बाद शिव जी आते हैं , वे वंदना करते हुए कहते हैं कि मैं बार बार आपसे यही वरदान माँगता हूँ कि मुझे आपके चरण कमलों की अचलभक्ति और सदा सत्संग प्राप्त हो । प्रसन्न होकर मुझे यह वर दीजिए ।
भक्ति विना सत्संग के टिकती नहीं है। एक पल का कुसंग हमारा सब कुछ नष्ट कर सकता है । अतएव अपनी भक्ति को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए सदा सत्संग करें । अथ ! जय राम राम , जय राम राम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

