अयोध्या (संवाददाता) सुरेंद्र कुमार। श्री राम जन्मभूमि फैसले के बाद हनुमानगढ़ी अयोध्या ने पटना के महावीर मंदिर पर अपना दावा ठोककर नया विवाद खड़ा करने की कोशिश की है। इसके मालिकाना हक को लेकर हनुमानगढ़ी की ओर से एक महीने तक जगह-जगह हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। अब उस हस्ताक्षर अभियान को आधार बनाकर बिहार धार्मिक न्यास पर्षद को पत्र भेजकर मंदिर पर अपने स्वामित्व का दावा किया है। मामले में बिहार धार्मिक न्यास पर्षद ने अबतक कोई टिप्पणी नहीं की है लेकिन महावीर मंदिर न्यास समिति ने हनुमानगढ़ी के दावे को बेबुनियाद और निराधार बताया है। महावीर मंदिर न्यास समिति ने शुक्रवार को पटना में प्रेस वार्ता कर मामले में अपना पक्ष रखा है। आचार्य कुणाल ने इस मामले पर कहा कि अयोध्या में महावीर मंदिर की ओर से संचालित हो रही राम रसोई की ख्याति हाल के दिनों में देश भर में फैली है। साथ ही, राम मंदिर के निर्माण में न्यास समिति की ओर से प्रतिवर्ष दो करोड़ रुपये की सहयोग राशि का संकल्प है और यह राशि दी जा चुकी है। इन सबके साथ-साथ केसरिया में विराट रामायण मंदिर के निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। साथ ही पटना में पांच विशाल अस्पतालों के निर्माण एवं सुव्यवस्था के कारण लोकप्रियता को लेकर महावीर मंदिर हनुमानगढ़ी के कुछ लोगों की आंखों की किरकिरी बन गया है। महावीर मंदिर न्यास समिति की लोकप्रियता के खुन्नस में ही यह विवाद खड़ा करने की कोशिश हनुमानगढ़ी की ओर से की गई है। हालांकि, इन दावों में कोई दम नहीं हैं। महावीर मंदिर के स्वामित्व को लेकर पटना उच्च न्यायालय द्वारा पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है। आचार्य कुणाल ने कहा कि कि हनुमानगढ़ी के दावे के विरोध में और न्यास समिति के स्वामित्व के पक्ष से जुड़े कानूनी और विधिक दस्तावेज बिहार धार्मिक न्यास पर्षद को पहले ही भेजे जा चुके हैं।

