7 फरवरी – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
छुद्र नदीं भरि चलीं तोराई ।
जस थोरेहुँ धन खल इतराई
भूमि परत भा ढाबर पानी ।
जनु जीवहि माया लपटानी ।।
( किष्किंधाकांड 13/3)
राम राम 🙏🙏
सुग्रीव को राजा बनाकर राम जी वर्षा ऋतु में प्रवर्षण पर्वत पर निवास कर रहें हैं ।लक्ष्मण को वर्षा ऋतु का वर्णन करते हुए वे कहते हैं कि छोटी नदियाँ जल भरने के कारण अपने किनारों को तोड़कर बह रहीं हैं जैसे थोड़ा धन पाकर दुष्ट मर्यादा हीन आचरण करने लगते हैं । पृथ्वी पर पड़ते ही पानी उसी तरह मलिन हो गया है जैसे जीव माया युक्त होने पर मलिन हो जाता है ।
जगत का धन मर्यादा तोड़ना सीखाता है जबकि राम धन मिलने पर जीव मर्यादा में रहता हैं , इसीतरह मायायुक्त जीव राम युक्त होने पर स्वच्छ व निर्मल हो जाता है । अतएव राम संग करें । अथ ! राम राम जय राम राम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

