श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

8 फरवरी – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

भए बरन संकर कलि
भिन्नसेतु सब लोग ।
करहिं पाप पावहिं दुख
भय रुज सोक बियोग ।।
( उत्तरकांड, दो. 100)
राम राम 🙏🙏
श्री राम कथा सुनाने के बाद काकभुसुंडि जी अपने पहले जन्म की कथा गरुड़ जी को सुना रहें हैं जब कलियुग था । वे कहते हैं कि इस समय लोग वर्णसंकर हो गये और मर्यादा छोड़ दिए , पाप करते थे परिणाम में दुःख , भय , शोक , रोग और वियोग पाते थे ।
आज भी कलियुग है , वही सब हो रहा है जो उस समय हुआ । जिसने जिसने भी मर्यादा छोड़ी है वह दुखी है । मर्यादा में तो वही रहता है जिसने राम जी को पकड़ रखा है । अतएव सुखी रहना है तो मर्यादा पुरुषोत्तम के साथ रहें । अथ ! राम राम जय सीताराम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

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