4 मार्च- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
पापवंत कर सहज सुभाऊ ।
भजन मोर तेहि भाव न काऊ ।।
जौं पै दुष्ट ह्रदय सोई होई
मोरें सन्मुख आव कि सोई ।।
( सुंदरकांड 43/2)
राम राम 🙏🙏
विभीषण राम जी की शरण में आए हैं , सुग्रीव संदेह प्रकट करते हैं , वे कहते हैं कि भेद लेने आया है । राम जी कहते हैं कि पापी का यह सहज स्वभाव होता है कि उसे मेरा भजन नहीं भाता है , विभीषण भी यदि हृदय का बुरा होता तो क्या वह मेरे पास आता अर्थात् न आता ।
आपको पाप पसंद है या पुण्य, यह राम जी ने बताया है । पुण्यवान राम को पसंद करता है जबकि पापवंत रावण का साथ देता है । आपको अभी तक राम गुणगान अच्छा नहीं लगता है तो अपने पुण्य बढ़ाएँ जिससे राम भाएँ । अथ ! राम राम जय राम राम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

