13 मार्च- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
प्रिय लागिहि अति सबहि मम,
भनिति राम जस संग ।
दारु बिचारु कि करइ कोउ,
बंदिअ मलय प्रसंग ।।
( बालकांड, ( दो. 10क )
जय सियाराम 🙏🙏
मानस जी के आरंभ में तुलसी बाबा अपनी रचना के बारे में बताते हुए कहते हैं कि श्री राम जी के यश के साथ मेरी यह काव्य रचना सबको अच्छी लगेगी जैसे मलय पर्वत के संग मात्र से लकड़ी ( चंदन बनकर ) वंदनीय हो जाती है , तब क्या कोई लकड़ी का विचार करता है ?
श्री राम यश की महिमा ही ऐसी है कि जो भी इससे जुड़ जाता है वह वंदनीय, पूजनीय हो जाता है, फिर चाहे वह व्यक्ति हो या वस्तु । अतएव ! जगत में प्रिय होना चाहते हैं तो जगदीश से जुड़े, रामजी से जुड़े । अथ ! श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम। श्री राम जय राम जय जय राम ।। 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

