होनहार विरवान के होत चीकने पात
विमला बहन के बागवानी कार्य को गति देने हेतु संकल्पित_ अभिनंदन
ब्यूरो चीफ आर एल पाण्डेय
लखनऊ। विनोबा सेवा आश्रम परिसर अभी कुछ दिन पहले तो इतना हरा भरा था कि मां दुर्गा की नौ दिन पूजा चली।तो प्रत्येक दिन एक थाली भरकर पीले फूल निकलते थे उसी प्रकार गौशाला से देशी गुलाब के।फूल आ जाते थे। पूरा परिसर हरा भरा रहने का कारण आश्रम की संरक्षक और रचनात्मक क्षेत्र में जमना लाल बजाज अवॉर्ड 2011 प्राप्त करने वाली विमला बहन अपनी दिनचर्या में बागवानी को शामिल किए हुए है। जैसे मंदिर पर पूजा करना, गौशाला में कमजोर गायों को दैनिक देखना, सुबह सुबह तथागत में आए हुए मेहमानों के द्वारा प्रयोग की हुई चादर आदि खुद धोना उनकी दिनचर्या का अंग है।ठीक वैसे ही रोज जलालपुर की लौंगश्री अम्मा और मामा रामकुमार गुप्ता को साथ लेकर कोई दिन ऐसा नहीं जाता कि जिस दिन उनकी बाबा नर्सरी में 100 नई कलम न लगे। जो मेहमान आया और उसने पेड़ पौधों की प्रशंसा करना स्वाभाविक है। तुरंत विमला बहन कई पौधे जैसे अपराजिता, कढ़ी पत्ता लेमन ग्रास कई तरीके की तुलसी और फूल के पौधे गमले में देने के लिए उद्यत रहती हैं। अच्छी बात है कि उनको देने के बाद बहुत संतुष्टि होती है। अगर कुछ नहीं तो उस दिन सारे परिसर से वे पौधे जो अपनी गति से नहीं बढ़ रहे हैं।उन्हें पलटवाना और फिर खाद आदि डालकर वहीं रखवाना। विनोबा सेवा आश्रम इंटर कॉलेज, विनोबा गो सेवा सदन ,विनोबा विद्यापीठ , वृद्ध जन आश्रम , स्वाबलंबन, अहिंसा सभागार, ईश्वाश्यम भवन, सचिवालय आदि में विमला बहन ने गिनकर पौधे रखवाए हैं।अगर पौधा मरता है,सूखता है या नष्ट होता है तो पौधा तो बदल जाएगा लेकिन प्रभारी को कुछ तो मीठी डांट खानी ही पड़ेगी। भाई ओमप्रकाश जी शाम को 4 से 6 बजे तक पौधों को पानी परोसते दिखाई पड़ेंगे। आज जहां नर्सरी में मिट्टी भराई का काम चल रहा था वहां आज आश्रम परिवार के।सबसे छोटे सदस्य अभिनंदन पहुंच गए तो संदेह था कि वह फूल तोड़ेंगे लेकिन हुआ उल्टा वह मिट्टी में बैठकर खाद मिक्स करने में मदद करने लगे। उनकी दादी विमला बहन को देखकर प्रसन्नता हुई कि।चलिए हमारे इस कार्य को नंदन जी आगे बढ़ाएंगे। भले ही अभिनंदन की उम्र अभी सवा साल ही हुई हो लेकिन उनके काम के सामने उनके यह उम्र के महीने उलटने पलटने पड़ते हैं। आश्रम के सारे कुत्ते उसके मित्र हैं।बंदरों का शत्रु है। अपने मित्रों के साथ बंदरों को परिसर से भगाता ही रहता है। चिड़िया तोता कबूतर दिख जायेंगें तो खूब खुश दिखेंगे। आश्रम परिसर की फुलवाड़ी और ज्यादा बढ़ने के आसार लगने लगे है। रचनात्मक कार्यों में उनकी बहुत अभिरुचि है हो भी क्यों न! क्योंकि अभी कुछ दिन पहले ही जयप्रभा कुटीर के अध्यक्ष श्री सभापति पाठक बनारस हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी के प्रमुख श्री विनय कुमार पांडे जी से अभिनन्दन (दक्ष) का जन्मांक बनवा कर लाए।उसमें मोटा मोटा लिखा कि रचनात्मक कार्यों में अत्यंत रुचि बनी रहेगी । उनके हांथ में गीता प्रवचन पुस्तक हर समय उनके हांथ में देख सकता है।बाबा की प्रतिमा पर जाकर उन्हें शाष्टांग प्रणाम करना विधिवत उनसे सीखा जा सकता है। प्रार्थना में उनकी भागीदारी पर्याप्त ही है।

