श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

4 जून – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

असुर समूह सतावहिं मोही ।
मैं जाचन आयउँ नृप तोही ।।
अनुज समेत देहु रघुनाथा ।
निसिचर बध मैं होब सनाथा ।।
( बालकांड 206/5)
राम राम 🙏🙏
विश्वामित्र जी राजा दशरथ के दरबार में आए हैं, राजा ने पूजन, भोजन आदि कराने के बाद पूछा कि मुनि किस कारण से आपका आगमन हुआ है। विश्वामित्र जी कहते हैं कि राजन ! असुर मुझे बहुत परेशान करते हैं और मेरे यज्ञ को विध्वंश कर देते हैं इसलिए मैं आपसे कुछ मांगने आया हूँ । छोटे भाई सहित राम को मुझे दे दीजिए, राक्षसों के मारे जाने पर मेरा यज्ञ कार्य निर्विघ्न हो जायेगा और मैं भी सुरक्षित हो जाऊँगा ।
श्री सीताराम चरण प्रेमियों !विश्वामित्र जी को असुर समूह सताते हैं जबकि हमें आपको काम क्रोध लोभ मोह मद मत्सर रूपी असुर प्रतिदिन प्रतिक्षण सताते रहते हैं । श्री राम जी को माँगकर विश्वामित्र मुनि जी सुरक्षित हो गये, इसी तरह श्री राम जी को अपनाकर हम आप भी सुरक्षित हो सकते हैं । अत: श्री सीताराम चरणों की शरणागति अपनाएँ और सुरक्षित हो जाएँ । शरणागति पाने के लिए केवल एक प्रयत्न करना होगा वो है सतत श्री सीताराम नाम जप अतएव भजिए…… श्री राम जय राम जय जय राम, श्री राम जय राम जय जय राम । जय सियाराम जय जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम, पतित पावन सीताराम। सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

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