श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

01 जुलाई – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

राम बिमुख संपति प्रभुताई ।
जाइ रही पाई बिनु पाई ।।
सजल मूल जिन्ह सरितन्ह नाहीं
बरषि गएँ पुनि तबहिं सुखाहीं ।।
( सुंदरकांड 22/3)
राम राम 🙏🙏
श्री हनुमान जी को मेघनाद नागपाश से बाँध कर रावण के दरबार में लाया है । रावण ने कुछ प्रश्न किए हैं, श्री हनुमान जी जबाब में उसे समझाते हुए कहते हैं कि श्री राम जी से विमुख ब्यक्ति की संपत्ति व प्रभुता रही हुई भी चली जाती है। उसका पाना न पाने के समान है जैसे जिन नदियों का अपना जलस्रोत नहीं होता है वे वर्षा बीत जाने पर फिर सूख जाती हैं अर्थात ज्यों की त्यौं रह जाती हैं ।
आत्मीय जन ! श्री राम जी हमारे जीवन के मूल हैं, नींव हैं । बिना मज़बूत नींव/मूल के वाह्य जगत में दिखने वाला सब कुछ अस्थायी है, कमजोर है। अस्तु! अपना मूल ठीक करें, श्री सीताराम शरणागति के लिए प्रयास करें एवं सदा श्री राम जी के सनमुख रहें। अतएव सतत नाम जप करते रहें…….श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम।
सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम.. 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

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