श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

6 अगस्त- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

मागु माथ अबहीं देउँ तोही।
राम बिरह जनि मारसि मोही ।।
राखु राम कहुँ जेहि तेहि भाँती।
नाहिं त जरिहि जनम भरि छाती।
( अयोध्याकाण्ड 33/4)
जय सियाराम 🙏🙏
कैकइ ने राजा दशरथ से दो वरदान माँग लिए हैं, श्री दशरथ जी उन्हें समझा रहे हैं । वे कहते हैं कि तू मेरा मस्तक माँग ले, मैं अभी दे दूँगा परंतु श्री राम विरह में मुझे मत मार, किसी भी प्रकार से श्री राम को वन न जाने दे अन्यथा तुम जीवन भर पछताएगी, दुखी रहेगी ।
आत्मीय जन ! जिसने भी आज तक श्री राम जी के विरुद्ध कोई कार्य किया है उसे पछताना ही पड़ा है, दुख भोगना ही पड़ा है। अतः श्री राम जी के विरुद्ध नहीं बल्कि श्री राम जी के अनुकूल कार्य करें और आजीवन आनंदित रहें। अतः श्री सीताराम जी के युगल चरणों का ध्यान कर केवल श्री सीताराम नाम का सतत भजन करते रहें…..श्री राम जय राम जय जय, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जानकीवल्लभ राजाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम। सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩 संकलन तरूण जी लखनऊ

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