गोरखपुर पासपोर्ट सेवा केंद्र में भ्रष्टाचार का बोलबाला: तत्काल सेवा के नाम पर खुलेआम ठगी : दलालों का कब्जा मुख्यमंत्री जी के कार्य क्षेत्र में बैखौफ है अधिकारी: कड़ी कार्यवाही की अपील
गोरखपुर ब्यूरो चीफ
गोरखपुर | आम जनता की सुविधा के लिए खोला गया गोरखपुर पासपोर्ट सेवा केंद्र अब भ्रष्टाचार और दलाल संस्कृति का गढ़ बन चुका है। खासकर तत्काल पासपोर्ट सेवा के नाम पर जो कुछ भी हो रहा है, वह न सिर्फ सरकारी सिस्टम की विफलता को उजागर करता है, बल्कि आम नागरिकों के साथ खुलेआम हो रही ठगी को भी सामने लाता है।
तत्काल सेवा के नाम पर छलावा, डिजीलॉकर बना बहाना
तत्काल सेवा के लिए 3500 रुपये की निर्धारित फीस लेकर आवेदकों से वादा किया जाता है कि उनका पासपोर्ट तय तिथियों में बनकर तैयार हो जाएगा। लेकिन हकीकत यह है कि जब तय तारीख आती है, तो आवेदकों को बिना किसी ठोस कारण के लौटा दिया जाता है। कई मामलों में जबरन उनसे यह लिखवाया जा रहा है कि वे पुलिस वेरिफिकेशन के बाद सामान्य प्रक्रिया से पासपोर्ट बनवाना चाहते हैं।
इस धोखे को ढंकने के लिए डिजीलॉकर सर्वर डाउन होने का बहाना दिया जा रहा है। पिछले 20 दिनों से यही बताया जा रहा है कि डिजीलॉकर काम नहीं कर रहा, जबकि उसी बीच में तत्काल सेवा के नाम पर फीस की वसूली बदस्तूर जारी है। सवाल ये उठता है कि जब सिस्टम ही फेल है, तो फिर फीस क्यों वसूली जा रही है?
C3 और C4 काउंटर पर हालात बदतर
पासपोर्ट सेवा केंद्र के C3 और C4 काउंटरों पर तो स्थिति और भी भयावह है। देवरिया से आए मुरारी खरवार ने बताया कि बिना किसी कारण के स्टाफ आवेदकों को लौटा रहा है। लोगों के साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है और शिकायतों को नजरअंदाज किया जा रहा है। यह रवैया सरकारी सेवाओं की संवेदनहीनता और जवाबदेही की कमी को दर्शाता है।
दलालों का मजबूत नेटवर्क, भ्रष्टाचार का नया मॉडल
पासपोर्ट बनवाने आए अभिषेक पांडेय ने बताया कि जब आवेदक हताश होकर लौटने लगते हैं, तब उन्हें संकेतों में बताया जाता है कि दलालों से संपर्क करें। दलाल 5000 से 7000 रुपये लेकर तत्काल वेरिफिकेशन कराने का दावा करते हैं। इस तरह एक पासपोर्ट बनवाने का कुल खर्च 8500 से 10,000 रुपये तक पहुंच जाता है।
ऐसा प्रतीत होता है कि गोरखपुर पासपोर्ट सेवा केंद्र अब एक आउटसोर्सिंग दलाल नेटवर्क बन गया है, जहां आम आदमी के अधिकारों की कोई कीमत नहीं बची है।
प्रशासन की चुप्पी और टालमटोल
इस पूरे मामले पर जब CISM अविनाश चटर्जी से प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने कहा, “डिजीलॉकर की समस्या UIDAI की है। शिकायत भेज दी गई है, अगले सप्ताह तक सब सामान्य हो जाएगा।” लेकिन सवाल अब यह है कि आम जनता कब तक हर हफ्ते ‘अगले सप्ताह’ की उम्मीद में ठगी जाती रहेगी?

