9 अगस्त- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
नाइ चरन सिरु कह कर जोरी ।
नाथ मोहि कछु नाहिन खोरी ।।
अतिसय प्रबल देव तव माया ।
छूटइ राम करहु जौं दाया ।।
( किष्किंधाकांड 20/1)
जय सियाराम 🙏🙏
सुग्रीव के श्री राम काज भूल जाने पर श्री राम जी ने लक्ष्मण जी से सुग्रीव को भय दिखाकर लाने को कहा है । सुग्रीव आए हैं, श्री राम जी को शीश नवाया है, फिर हाथ जोड़कर बोले, हे करूणानिधान! इसमें मेरा कुछ दोष नहीं है। आपकी माया अत्यंत प्रबल है, जब आप दया करते हैं, यह तभी छूटती है ।
आत्मीय जन ! हमारी स्थिति भी सुग्रीव की तरह है, हम रोज़ मंदिर जाते हैं और श्री राम जी से यही कह कर वापस लौट आते हैं तथा संसार में लग जाते हैं । माया संसार में लगे रहने से नहीं बल्कि श्री राम काज में लगने से छूटती है। किसी भी परिस्थिति में धर्म पालन करना ही राम काज है, करके देखें, श्री राम जी अपनी दया करुणा से माया मुक्त कर देंगे। श्री सीताराम जी की दया करुणा प्राप्त करने के लिये हम सभी को केवल श्री सीताराम नाम की रट लगाए रखनी है । अस्तु….. श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम। सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

