दिव्यांग बच्चों के लिए करंजाकला में हुआ विशेष मेडिकल असेसमेंट कैंप आयोजित

दिव्यांग बच्चों के लिए करंजाकला में हुआ विशेष मेडिकल असेसमेंट कैंप आयोजित

सैकड़ों बच्चों को मिला नया जीवन-संवरने का अवसर, 21 ब्लॉकों में अब तक 925 बच्चों का हुआ परीक्षण

जौनपुर 21 अगस्त, 2025 (सू0वि0)- समाज के सबसे संवेदनशील वर्ग, दिव्यांग बच्चों के भविष्य को सशक्त बनाने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण पहल की गई। बीआरसी करंजाकला परिसर में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. गोरखनाथ पटेल के सौजन्य एवं खंड शिक्षा अधिकारी श्रवण कुमार यादव की देख-रेख में एक विशाल मेडिकल असेसमेंट कैंप का आयोजन हुआ।
           कैंप में कुल 66 दिव्यांग बच्चों का पंजीकरण किया गया, जिनमें से 52 बच्चों को यूनिक डिसएबिलिटी आईडी (यू-डीआईडी) कार्ड से लाभान्वित किया गया। यह कार्ड भविष्य में बच्चों को न केवल शैक्षणिक क्षेत्र में, बल्कि सरकारी सेवाओं, छात्रवृत्ति एवं दिव्यांग कोटे के अंतर्गत मिलने वाले विभिन्न लाभों में सहायक होगा।
            जिलेभर में 925 बच्चों का परीक्षण- जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने जानकारी दी कि अब तक जिले के 21 ब्लॉकों में मेडिकल असेसमेंट कैंप आयोजित कर लगभग 925 दिव्यांग बच्चों का परीक्षण किया जा चुका है। इनमें से 741 बच्चों को दिव्यांगता प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रमाणपत्र बच्चों के जीवन को दिशा देगा और उन्हें सामाजिक एवं शैक्षणिक अवसरों में बराबरी दिलाने का मजबूत आधार बनेगा।
            विशेषज्ञ चिकित्सकों की रही अहम भूमिका – कैंप में विभिन्न चिकित्सकों की टीम ने दिव्यांग बच्चों की गहन जांच की। इसमें हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय सिंह, नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ डॉ. निधि, मानसिक रोग विशेषज्ञ राम प्रकाश पाल तथा फिजियोथेरेपिस्ट पी.डी. तिवारी शामिल रहे। सभी विशेषज्ञों ने बच्चों को चिन्हित कर उनकी समस्याओं का आकलन किया और उचित मार्गदर्शन दिया।
          स्पेशल एजुकेटरों ने दिया सहयोग- बच्चों के परीक्षण कार्य में स्पेशल एजुकेटर दुष्यंत सिंह, संतोष मिश्र, किरण पांडेय व सुषमा ने विशेष सहयोग प्रदान किया। इन शिक्षकों ने बच्चों की शैक्षणिक आवश्यकताओं और विशेष जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अभिभावकों को भी आवश्यक सुझाव दिए।
           शिक्षा विभाग की सराहनीय पहल- जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने कहा कि “दिव्यांग बच्चों को मुख्यधारा में जोड़ना ही हमारी प्राथमिकता है। मेडिकल असेसमेंट कैंप के जरिए न केवल उनकी पहचान हो रही है बल्कि उन्हें आगे के जीवन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।“
          स्थानीय अभिभावकों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के कैंप उनके बच्चों के उज्जवल भविष्य की राह खोल रहे हैं।

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