4 सितंबर- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
काम कोह मद मान न मोहा ।
लोभ न छोभ न राग न द्रोहा ।।
जिन्ह कें कपट दंभ नहिं माया
तिन्ह कें हृदय बसहु रघुराया ।।
( अयोध्याकाण्ड 129/1)
जय जय सियाराम 🙏🙏
महर्षि बाल्मीकि जी के आश्रम पहुँचने पर श्री राम जी द्वारा यह पूछने पर कि मैं कहाँ निवास करूँ, श्री बाल्मीकि मुनि कहते हैं कि जिनके काम , क्रोध, लोभ , मोह, मद, मत्सर, राग ,द्वेष, कपट , माया आदि नहीं है, हे श्री राम जी आप उनके हृदय में निवास करें ।
आत्मीय जनों ! श्री राम जी के हृदय में वास करने कि जो शर्ते बाल्मीकि जी ने बताई हैं उनको हम आप पूरा नहीं कर सकते हैं । इतने दोषों का कैसे मुक़ाबला करें ? श्री सीताराम नाम का भजन सर्व दोष नाशक है। अतः सतत श्री राम जी के रूप, गुण और लीला का निरन्तर चिंतन करते हुए श्री राम नाम का भजन करते रहें तभी श्री राम जी को अपने हृदय सिंहासन में बसा सकते हैं । अथ…..श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

