श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

6 अक्टूबर- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

तब लगि हृदयँ बसत खल नाना ।
लोभ मोह मच्छर मद माना ।।
जब लगि उर न बसत रघुनाथा ।
धरें चाप सायक कटि भाथा ।।
( सुंदरकाड 46/1)
जय श्री राम 🙏🙏
विभीषण श्री राम जी की शरण में आए हैं, श्री राम जी ने उनकी कुशल पूछी है और कहा कि भगवान बुरी संगति से बचाए । विभीषण कहते हैं कि लोभ , मोह , ईर्ष्या और मान आदि दुर्गुण तभी तक हृदय में बसते हैं जब तक की धनुष धारी श्री राम जी हृदय में नही बस जाते हैं ।
आत्मीय जनों ! अनेकों असाध्य दुर्गुणों को अपने हृदय से बाहर निकालना चाहते हैं तो श्री राम जी को हृदय में बैठाने, उन्हें धारण करने का यत्न करें । इसके लिये केवल एक ही उपाय सर्वोत्तम है वह है श्री सीताराम नाम भजन । अतः राम सुमिरन, राम भजन में लगें। अथ….. श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम, जानकीवल्लभ राजाराम ।
सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩
संकलन तरुण जी लखनऊ

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