10अक्टूबर- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
धरमु न दूसर सत्य समाना ।
आगम निगम पुरान बखाना ।।
मैं सोइ धर्म सुलभ करि पावा।
तजें तिहूँ पुर अपजसु छावा।।
( अयोध्याकाण्ड 94/3)
राम राम🙏🙏 श्री दशरथ जी के कहने के अनुसार सुमंत्र, श्री राम भैया लक्ष्मण व माता सीता को वन लेकर गये । श्रृंगवेरपुर में निषाद से मिलने के बाद श्री राम जी आगे चलते हैं तब सुमंत्र जी कहते हैं कि राजा जी ने तो वन दिखाकर वापस लाने को कहा है । श्री राम जी कहते हैं कि शिबि , दधीचि और हरिश्चंद्र ने धर्म के लिए बहुत कष्ट सहे हैं । सत्य के समान कोई दूसरा धर्म नहीं है, मैंने उस धर्म को सहज ही पा लिया है । इस सत्य रूपी धर्म का त्याग करने से तीनों लोकों में अपयश छा जाएगा ।
आत्मीय जन ! सत्य ही धर्म है और श्री राम जी ही सत्य हैं , जिसने श्री राम जी को अपनाया , उसे लोक में सुयश मिला, जिसने श्री राम जी को त्यागा, उसे अपयश मिला । अतः विचार करें ! धर्म निभाएँ, श्री राम जी को अपनाएँ। अथ…..श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩 संकलन तरुण जी लखनऊ

