श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

6 नवम्बर- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

उमा जोग जप दान तप,
नाना मख ब्रत नेम ।
राम कृपा नहिं करहिं तसि,
जसि निष्केवल प्रेम ।।
( लंकाकांड दो. 117)
राम राम जी 🙏🙏
लंका विजय के बाद श्री राम जी ने विभीषण को लंका का राज करने कहा है, तब विभीषण रत्न, वस्त्र आदि विमान में भरकर लाते हैं और श्री राम जी के कहने पर आकाश में ले जाकर वर्षा कर देते हैं। कपियों को जो अच्छा लगता है , वे ले लेते हैं , मणियों को मुख में डालकर उगल देते हैं। श्री राम , लक्ष्मण जी और माता सीता जी यह देखकर हँसते हैं। भगवान शिव जी कहते हैं कि हे उमा ! अनेकों प्रकार के योग, जप , दान, तप, व्रत करने पर भी श्री राम जी वैसी कृपा नहीं करते हैं जैसी केवल अनन्य प्रेम करने पर कर देते हैं।
बंधुवर। हम आप श्री राम जी की कृपा तो चाहते हैं परंतु अपनी अनन्यता नहीं बढ़ाते हैं। श्री राम जी के प्रति अपनी अनन्यता बढ़ाएँ और श्री राम जी की कृपा पाएँ। अथ…..श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩 संकलन तरुण जी लखनऊ

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