श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

15 नवंबर- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

बिनती करउँ जोरि कर रावन ।
सुनहु मान तजि मोर सिखावन।।
देखहु तुम निज कुलहि बिचारी ।
भ्रम तजि भजहु भगत भय हारी।
( सुंदरकांड 21/4)
जय सियाराम 🙏🙏 श्री हनुमान जी को नागपाश से बांधकर मेघनाद रावण के दरबार में ले जाता है। रावण ने श्री हनुमान जी से कुछ प्रश्न किया है, श्री हनुमान जी उनका उत्तर देते हुए कहते हैं कि हे रावण ! मैं तुमसे विनती करता हूँ कि तुम अभिमान छोड़कर मेरी बात सुनो! अपने पवित्र कुल का विचार कर देखो और भ्रम छोड़ कर भक्त भयहारी भगवान को भजो।
बंधुवर! भगवान भक्तों के भय का हरण करते हैं कारण भक्त निरभिमानी रहता है। आपसे अभिमान नहीं छूट रहा है तो कोई बात नहीं,अपना नाम भजन सुमिरन बढ़ा दीजिए, मान,अभिमान सब छूट जाएगा और करूणानिधि श्री सीताराम जी की कृपा पाइए। अस्तु….श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम। सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩

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