श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

24 नवंबर- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

भूमि जीव संकुल रहे
गए सरद रितु पाइ ।
सदगुर मिलें जाहिं जिमि
संसय भ्रम समुदाइ ।।
( किष्किंधाकांड, दो. 17)
राम राम 🙏🙏
सुग्रीव को राजा बनाकर श्री राम जी वर्षा ऋतु में प्रवर्षण पर्वत पर वास कर रहे हैं । वे भैया लक्ष्मण को ऋतु वर्णन करते हुए कहते हैं कि वर्षा ऋतु के कारण पृथ्वी पर जो जीव भर गये थे , वे शरद ऋतु के आगमन पर वैसे ही नष्ट हो जाते हैं जैसे सद्‌गुरु के मिलने पर सकल संदेह व भ्रम नष्ट हो जाते हैं ।
आत्मीय जन ! जीव जब तक जगत् में लगा रहता है , तब तक वह नाना प्रकार के संदेह व भ्रम से भरा /घिरा रहता है परंतु जैसे ही वह श्री राम जी की भक्ति में लगता है , तो जीव के भी संसय व भ्रम समाप्त हो जाते हैं । अथ….. श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम, जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩 संकलन तरुण जी लखनऊ

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