श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

28 नवंबर- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

कलिमल ग्रसे धर्म सब
लुप्त भए सदग्रंथ।
दंभिन्ह निज मति कल्पि करि,
प्रगट किए बहु पंथ ।।
( उत्तरकांड. दो. 97)
राम राम जी🙏काकभुसुंडि जी गरुड़ महराज को अपने पहले जन्म की कथा सुना रहें हैं। उस समय कलियुग था, उनका जन्म अयोध्या में हुआ था। कलियुग के पापों ने सब धर्मों को ग्रस लिया था, सदग्रंथ लुप्त हो गए थे और दंभियों ने अपनी बुद्धि से कल्पना कर बहुत से पंथ बना लिए थे ।
बंधुओं ! कलियुग पापमय है, इसमें अनेक पंथ हो सकते हैं , सब पाप युक्त होंगे परंतु कलियुग में श्री राम धर्म व श्री राम पंथ ही पाप मुक्त रहते हैं, इन पर कलियुग का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। अतः श्री राम धर्म अपनाकर श्री राम पंथ पर चलें । अस्तु…..श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम
🚩🚩🚩 संकलन तरुण जी लखनऊ

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