30 नवंबर-श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
सब के उर अंतर बसहु
जानहु भाउ कुभाउ ।
पुरजन जननी भरत हित
होइ सो कहिअ उपाउ ।।
( अयोध्याकाण्ड, दो. 257)
राम राम जी🙏🙏
भैया भरत जी अयोध्या के समाज सहित चित्रकूट धाम आ गये हैं। बैठक होती है, गुरु वशिष्ठ जी कहते हैं कि एक उपाय है यदि भरत व शत्रुघ्न आप वन में रहो तो श्री राम लक्ष्मण सीता वापस अयोध्या लौट सकते हैं। भैया भरत जी कहते हैं कि इसमें सबकी भलाई होगी। भैया भरत जी की यह बात गुरु वशिष्ठ जी को बहुत भाती है । सब श्री राम के पास आते हैं। गुरु वशिष्ठ जी श्री राम जी से कहते हैं कि हे राम ! आप सबके हृदय में बसते हैं , सबके भले -बुरे भाव को जानते हैं , जिसमें अयोध्या वासियों, सभी माताओं तथा भरत जी का भला हो , वही उपाय आप बताइए ।
बंधुवर ! हम आप यह तो मानते हैं भगवान हमारे भीतर बसते हैं परंतु इस पर ध्यान नहीं देते हैं कि वे हमारे बुरे भावों को भी जानते हैं। इसी कारण हमारा हित नहीं होता है। अस्तु! हम अपना कुभाव ठीक कर लें तो श्री राम जी हमारा सदा हित करेंगे। अथ…..श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩
संकलन तरुण जी लखनऊ

