12 दिसंबर. श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
जनक सुकृत मूरति बैदेही ।
दसरथ सुकृत रामु धरें देही ।।
इन्ह सम काहुँ न सिव अवराधे।
काहुँ न इन्ह समान फल लाधे ।। ( बालकांड 309/1)
जय श्री राम 🙏🙏
श्री राम जी की बारात जनकपुर आ गई है । सभी जनकपुरवासी आनंदित हैं । सभी आपस में एक दूसरे से कह रहें हैं कि महाराज श्री जनक जी के पुण्य की मूर्ति श्री जानकी जी हैं और महाराज श्री दसरथ जी के पुण्य देह धारण किए श्री राम जी हैं । इन दोनों राजाओं के समान किसी ने भगवान शिव जी की आराधना नहीं की, और न इनके समान किसी ने फल पाए।
आत्मीय जन ! हमारे पुण्य ही हमारे जीवन में फलित होते हैं । जितना अधिक पुण्य उतने ही बेहतर परिणाम। अतः अपना पुण्य बढ़ाकर श्री दशरथ जी और श्री जनक जी जैसे श्री राम जी और श्री सीता जी जैसे बेटा बेटी पाने का पुण्य फल पाएँ अपने जीवन में अधिक से अधिक पुण्य अर्जित करने का केवल एक ही साधन है कि कुत्सित, स्वार्थी और सांसारिक चित्त वृत्ति न रखकर निस्वार्थ भाव से श्री सीताराम जी की सेवा पूजा गुणगान और नाम का निरन्तर भजन करते रहना । अस्तु…..श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩 संकलन तरुण जी लखनऊ

