22 दिसंबर.श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
जरउ सो संपति सदन सुखु,
सुहृद मातु पितु भाइ ।
सनमुख होत जो राम पद,
करै न सहस सहाइ ।।
( अयोध्याकाण्ड, दो. 185)
राम राम जी 🙏
महाराज दशरथ जी के सुरलोक गमन के उपरांत भैया भरत जी ननिहाल से बुलाए जाते हैं तथा महर्षि वशिष्ठ जी उन्हें अयोध्या का राज सम्हालने को कहते हैं , इधर भैया भरत जी श्री राम दर्शन की लालसा प्रकट करते हैं । सबने भईया भरत की प्रशंसा की है । सभी अयोध्यावासी कहते हैं कि वह संपत्ति, घर , सुख , मित्र, माता, पिता , भाई जल जाए जो श्रीराम के चरणों में प्रीति लगाने के लिए सहज ही सहयोगी न बनें ।
बंधुवर ! हमारी सुख , संपदा , परिवार , परिजन का महत्व तभी है जब ये सब हमें श्री राम सनमुख होने में सहायक बनें अन्यथा यह सब महत्वहीन हैं । अतः अपने को तथा अपने संबंधों को श्री राम काज में लगा कर अपने जीवन को सार्थक बना लें । अस्तु…… श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩

