शिक्षा के व्यवसायीकरण को रोका जाए: बादल चोपड़ा

आर एल पाण्डेय
लखनऊ। उत्तर प्रदेश कोचिंग संघ के प्रदेश अध्यक्ष बादल चोपड़ा ने दास कोचिंग राजाजीपुरम में वरिष्ठ पत्रकार आर एल पाण्डेय से शिक्षक दिवस पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षकों में इतना आत्मबल होना चाहिए कि वह निसंकोच विवेकशील दिशा निर्देश कर सकें। निसंदेह विद्यार्थियों के पास आज ज्ञान के कई स्रोत है। इंटरनेट की मदद से वे अपनी जिज्ञासा शांत कर सकते हैं पर इंटरनेट सच्चे शिक्षक की तरह तथ्यों और तर्कों से अपने जीवन अनुभवों का समावेश कर विद्यार्थियों को सही राह नहीं दिखा सकता। आदि काल मे वात्सल्य व सम्मान के सहारे गुरु और शिष्य जीवन एक अटूट रिश्ते में बंध जाते थे। उसी पवित्र रिश्ते की जरूरत इस भौतिकवादी युग में आन पड़ी है। आज के युग में गुरु शिष्य परंपरा के तहत इस प्रकार शिक्षा का व्यवसायीकरण हो गया है कि एक ही क्लास में पढ़ने व पढ़ाने वाला शिष्य और गुरु यदि कहीं बाहर मिल जाए तो एक दूसरे को पहचान नहीं सकते ।इस भीड़ तंत्र वाली कक्षा में गुरु व शिष्य के रिश्ते समाप्त हो चुके हैं, एक ऐसा रिश्ता के शिष्य गुरु को नहीं पहचान रहा और गुरु शिष्य को नहीं। सत्य, अहिंसा, प्रेम, शांति जैसे शाश्वत मानवीय मूल्यों की पुनः प्रतिष्ठा आवश्यक है जिसकी सीधी जिम्मेदारी एक शिक्षक की है। शिक्षक की यह विचारधारा होनी चाहिए कि उसने छात्र का एडमिशन नहीं लिया है, उसे गोद लिया है… वह उसका पुत्र या पुत्री है।

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