8 मार्च: रामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
बिनु बिस्वास भगति नहिं,
तेहि बिनु द्रवहिं न रामु।
राम कृपा बिनु सपनेहुँ,
जीव न लह बिश्रामु ।।
( उत्तरकांड, दो. 90)
जय जय सियाराम 🙏🙏
अपने मोह की कथा सुनाने के बाद काकभुसुंडि जी गरूड़ जी से कहते हैं कि बिना विश्वास के भक्ति नहीं होती है और भक्ति के बिना श्री राम जी द्रवित नहीं होते हैं तथा श्री राम कृपा के बिना जीव स्वप्न में भी शांति नहीं पाता है ।
आत्मीय जन ! श्री राम जी भक्ति से द्रवित होते हैं, श्री राम जी का द्रवित होना ही उनकी कृपा है । इसलिए विश्वास पूर्वक भक्ति करें , जिससे श्री राम जी द्रवित होकर हम पर कृपा करें, कारण श्री राम कृपा बिना केवल अशांति रहती है , जीव अशांत रहता है । अतः अटूट विश्वास के साथ भक्ति करें और असीम आनन्द सागर में गोते लगाए । अथ…. श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम।
सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩 संकलन तरुण जी लखनऊ

