10 मार्च : रामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
सगुन उपासक परहित,
निरत नीति दृढ़ नेम ।
ते नर प्रान समान मम,
जिन्ह कें द्विज पद प्रेम ।।
( सुंदरकांड , दो. 48)
राम राम जी🙏🙏
विभीषण, श्री राम जी की शरण में आए हैं , विभीषण के आचरण से प्रसन्न होकर श्री राम जी उन्हें अपना स्वभाव बताते हुए कहते हैं कि जो साकार भगवान को पूजते हैं, दूसरे के हित में लगे रहते हैं, नीति और नियम में दृढ़ हैं तथा जिन्हें श्रेष्ठ के चरण प्रिय हैं, ऐसे मनुष्य मेरे प्राणों के समान हैं ।
आत्मीय जन! श्री राम जी की कृपा तो सब चाहते हैं, परन्तु श्री राम कृपा पाने के लिये प्रभु ने कुछ शर्तें रखी हैं जैसे सगुण भगवान की उपासना, परहित , नीति पालन व अपने से बड़ों के प्रति आदर , इन सब का पालन कर हम आप भी श्री राम जी के प्रिय बन सकते हैं । अथ….श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम ।
सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩 संकलन तरुण जी लखनऊ

