जिला जज ने किया लोक अदालत का किया शुभारंभ

जिला जज ने किया लोक अदालत का किया शुभारंभ

(राजेश श्रीवास्तव ब्यूरो चीफ)

अयोध्या।शनिवार को को माॅं सरस्वती जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलन के साथ वृहद राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारम्भ जिला जज रणंजय कुमार वर्मा ने किया।उन्होंने माॅं सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलन कर किया।इस अवसर पर जिला जज न्यायाधीश रणंजय कुमार वर्मा ने कहा कि लोक अदालत की मूल भावना में लोक कल्याण की भावना समाहित है। सुलह समझौता के दौरान सभी का मान, सभी का सम्मान, सभी को न्याय मिले इसका ध्यान रखा जाता है।राष्ट्रीय लोक अदालत में दोनों पक्षों के हितों को ध्यान में रखकर आपसी सुलह-समझौते के माध्यम से वादों को निस्तारित कराया जाता है।लोक कल्याण के भावना से ओत-प्रोत उसी स्वरूप को उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय द्वारा विस्तार रूप देते हुए एक स्थल, एक मंच पर बहुत सारे वादों को सुलह-समझौता के आधार पर समाप्त कराने के उद्देश्य से राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित कराने के निर्देश दिये जाते हैं,।जिसमें दोनों पक्षों के हित के साथ सामाजिक प्रेम भावना भी समाहित है।कहा कि लोग मिल-जुल कर प्रेम भावना से रहे, जो समाज एवं राष्ट्र के हित में है। यदि आपसी मतभेद पनपते भी हैं, तो उसे शांत एवं सद्भाव के साथ समाप्त करने का प्रथम प्रयास दोनों पक्षों द्वारा किया जाना चाहिए।यदि प्रथम प्रयास में दोनों पक्ष सफल नहीं होते है तभी उन्हें न्यायालय के शरण जाना चाहिए। माननीय जनपद न्यायाधीश द्वारा बताया गया कि जनपद न्यायालय परिसर के अतिरिक्त क्लेक्टेªट एवं सभी तहसीलों में आपसी सुलह-समझौता के आधार पर वादों का निस्तारण कराया जाय।इस अवसर पर सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रंजिनी शुक्ला ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य न्यायालय व कार्यालय की प्रक्रियात्मक जटिलता से इतर सस्ता, सुलभ व त्वरित न्याय सभी को उपलब्ध कराना है तथा वैकल्पिक विवाद समाधान ;।सजमतदंजपअम क्पेचनजम त्मेवसनजपवदद्ध को और अधिक सुदृढ़ व प्रभावी बनाना है। यह तथ्य हम सभी से छिपा नहीं है कि मुकदमों की बढ़ती संख्या व उनके अग्रिम निस्तारण हेतु हमें एक वैकल्पिक व्यवस्था की आवश्यकता है। इस क्रम में नियमित अंतराल पर होने वाली लोक अदालत का आयोजन इसी दिशा में बढ़ाया गया एक सराहनीय कदम है। सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अयोध्या द्वारा अपने उद्बोधन में यह भी कहा गया कि सुलह समझौते के माध्यम से वादकारी के धन व समय की बचत होती है। लोक अदालत के आयोजन में आने वाले दोनों पक्षों के बैठने, शुद्ध पेयजल आदि की समुचित व्यवस्था करायी गई है। लोक अदालत में आने वाले सभी व्यक्ति के सुविधा का ख्याल रखा गया है और यह प्रयास किया जा रहा है कि आज इस वृहद लोक अदालत में अधिक से अधिक वादों को आपसी सुलह-समझौता के माध्यम से समाप्त कराकर लोगों को राष्ट्रीय लोक अदालत के उद्देश्य का लाभ दिलाया जा सके।बताया कि धारा 138 पराक्राम्य लिखत अधिनियम (एन.आई.ऐक्ट), बैंक वसूली वाद, श्रम विवाद वाद, विद्युत एवं जलवाद बिल, (अशमनीय वादों को छोड़कर) अन्य आपराधिक शमनीय वाद, पारिवारिक एंव अन्य व्यवहार वाद, पारिवारिक विवाद, भूमि अधिग्रहण वाद, सर्विस मैटर से संबन्धित वेतन, भत्ता और सेवानिवृत्ति लाभ के मामले, राजस्व वाद, जो जनपद न्यायालय में लम्बित हों, अन्य सिविल वाद आदि निस्तारित किये गये।दीपक यादव,अपर जिला जज/नोडल अधिकारी, राष्ट्रीय लोक अदालत एवं रंजिनी शुक्ला सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, ने बताया कि शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 81803 वादों को निस्तारित किया गया एवं कुल समझौता राशि मु0 182350335 रू0 है।जिसमें पीठासीन अधिकारी (वर्चुअल कोर्ट) निवेदिता सिंह ने अथक प्रयास करते हुए 32436 वादों का निस्तारण किया। उनके द्वारा राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन में अत्यंत सराहनीय कार्य किया गया।रवि कांत न्यायाधीश मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण द्वारा ड।ब्ज् में कुल 138 केस निस्तारण हेतु नियत थे, जिसमें से कुल 115 वाद निस्तारित किये गये, जिस पर कुल 10,14,69,769/- रू0 की धनराशि क्षतिपूर्ति निर्धारित की गयी।बैंक रिकवरी से संबन्धित 1084 प्री-लिटिगेशन वाद निस्तारित किये गये तथा बैंक संबन्धित ऋण मु0- 6,88,91,512/- रू0 का सेटेलमेंट किया गया, जो विगत लोक अदालत की तुलना में अधिक है। यह एल0डी0एम0 गणेश सिंह यादव द्वारा उठाया गया सराहनीय कदम पारिवारिक विवाद से सम्बन्धित 69 मुकदमों को निस्तारित किया गया है,जिसमें कई पुराने वाद निस्तारित किये गये।वाणिज्यिक न्यायालय से सम्बन्धित 11 मुकदमों को निस्तारित किया गया जिसमें 53,92,833/- रू0 सेटेलमेंट किया गया।मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा 4256 वाद अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम द्वारा 2082 वादों का निस्तारण किया गया जो विगत लोक अदालत की तुलना में अधिक वाद निस्तारित किया गया है।राजस्व मामलों से संबन्धित 29608 वाद विभिन्न राजस्व न्यायालय द्वारा निस्तारित किया गया। इस मौके पर रवि कान्त पीठासीन अधिकारी एम0ए0सी0टी0, वेद प्रकाश वर्मा, पीठासीन अधिकारी, कामर्शियल न्यायालय, शिवानी जायसवाल,सुरेन्द्र मोहन सहाय, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-प्रथम, राकेश कुमार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश एस0सी0/एस0टी0 एक्ट, निरूपमा विक्रम, अपर जिला जज/विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट-प्रथम, रजत वर्मा, विशेष न्यायाधीश, विशेष कोर्ट सं0-01, नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत दीपक यादव अपर जनपद न्यायाधीश, अपर जनपद न्यायाधीश मोहिन्दर कुमार, प्रतिभा नारायण, पे्रम प्रकाश, इन्द्रजीत सिंह, अनिल कुमार वर्मा, अर्चना तिवारी, प्रदीप कुमार सिंह, रवि कुमार गुप्ता, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुधांशु शेखर उपाध्याय व अन्य न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे।

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